
अलीगढ़। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कैनेडी हॉल में आयोजित किसान सम्मेलन ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में नई चर्चा छेड़ दी। कार्यक्रम में मेरठ, अलीगढ़ और आगरा मंडल के हजारों किसानों ने भाग लिया।
सम्मेलन में प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने किसानों के हित में सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, उद्यानिकी क्षेत्र में किए गए नवाचारों और कृषि विकास की उपलब्धियों को विस्तार से रखा। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।
अपने संबोधन में दिनेश प्रताप सिंह ने अलीगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार विकास के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ की पहचान देश की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी हुई है और इस गौरव को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यदि शहर में पूर्व में पार्कों के नाम बदले जा सकते हैं तो भविष्य में अलीगढ़ के किसी महान सपूत के नाम पर भी सार्वजनिक स्थलों का नामकरण किए जाने पर विचार किया जा सकता है।
सम्मेलन की शुरुआत भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुई, जबकि समापन जय श्रीराम और हर-हर महादेव के नारों से हुआ। बड़ी संख्या में मौजूद किसानों ने सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में आठ जिलों से आए किसानों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। हजारों किसानों के वाहन विश्वविद्यालय परिसर में खड़े रहे और किसान पूरे दिन सम्मेलन में शामिल रहे।
सम्मेलन के बाद मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन उन्होंने AMU के प्रसिद्ध पुस्तकालय और संग्रहालय का निरीक्षण कर वहां की ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक धरोहरों की जानकारी प्राप्त की।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह आयोजन चर्चा का विषय बना रहा। समर्थकों का कहना है कि यह कार्यक्रम विकास, किसान कल्याण और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा, जबकि AMU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजित होने के कारण इसने विशेष ध्यान आकर्षित किया।
किसान सम्मेलन में सरकार की उपलब्धियों, कृषि क्षेत्र में नवाचारों, किसान कल्याण योजनाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।



