मेरठ में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, गोरक्षपीठ की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज की असीम कृपा एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में ब्लॉसम India फाउंडेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई।

प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अम्बेडकर नगर, गाजियाबाद और जौनपुर में सफल आयोजनों के बाद मेरठ में आयोजित इस संगोष्ठी में संत-महात्माओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

गोरक्षपीठ की परंपरा समाज को जोड़ने वाली शक्ति

कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी जी महाराज ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारत की संत परंपरा सदैव समाज को जोड़ने वाली शक्ति रही है। गोरक्षपीठ ने सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता के माध्यम से इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और अवसर पहुंचाने की प्रेरणा देता है।

सनातन संस्कृति का मूल भाव है समरसता

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति का मूल भाव ही समरसता है। उन्होंने समाज को जातीय, क्षेत्रीय और वैचारिक विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान किया।

स्वामी जी ने अपनी भिक्षा यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत की आत्मा आज भी गांवों, आश्रमों और समाज की जड़ों में जीवित है तथा उसे जागृत करने की आवश्यकता है।

राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता है सामाजिक समरसता

कार्यक्रम के अति-विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह जी ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने समाज के वंचित, उपेक्षित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है, जो आज के भारत के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करता है।

गोरक्षपीठ के सामाजिक योगदान पर हुआ मंथन

संगोष्ठी में वक्ताओं ने गोरक्षपीठ के गौरवशाली इतिहास, महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सामाजिक योगदान तथा वर्तमान समय में सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे।

वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्रीय एकता के लिए समाज में संवाद और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है।

‘समरसता संवाद’ समाज को जोड़ने का अभियान

ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं कार्यक्रम संयोजक शशि प्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का स्वागत करते हुए कहा कि “समरसता संवाद” केवल एक कार्यक्रम श्रृंखला नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक व्यापक अभियान है।

उन्होंने बताया कि प्रयागराज से प्रारंभ हुई यह समरसता यात्रा अब उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों तक पहुंच चुकी है और समाज के विभिन्न वर्गों से अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मेरठ का यह आयोजन सामाजिक समरसता के इस अभियान को और अधिक गति प्रदान करेगा।

25 विभूतियों को मिला ‘समरसता सम्मान’

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को समर्पित विभिन्न विषयों पर संवाद एवं विचार-विमर्श हुआ। उपस्थित जनसमुदाय ने गोरक्षपीठ की सेवा परंपरा और समाज को जोड़ने के उसके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 25 लोगों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया।

समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

संगोष्ठी का समापन राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के आदर्शों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक ले जाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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