लखनऊ में ‘भूजल संरक्षण एवं नदी पुनरुद्धार’ पर संगोष्ठी, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

लखनऊ, 20 जुलाई। राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश द्वारा सोमवार को “भूजल संरक्षण एवं नदी पुनरुद्धार” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भूजल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर सिंह, विशेष सचिव एवं निदेशक भूगर्भ जल विभाग राजेश प्रजापति तथा जल संरक्षण विशेषज्ञ एवं पूर्व आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विनोद तारे ने दीप प्रज्ज्वलन और जल कलश पूजन के साथ किया।

इस दौरान गंगा अवतरण पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। साथ ही राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया और “गंगा ज्ञान चक्र” पहल का परिचय भी कराया गया।

जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर

जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से जल संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों से “जल एंबेसडर” के रूप में कार्य करते हुए समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की।

वहीं, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए जल उपलब्धता की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की आवश्यकता और इसके व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

‘भागीरथ सम्मान’ से सम्मानित हुए उत्कृष्ट कार्यकर्ता

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को “भागीरथ सम्मान” से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों ने नागरिकों से जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव

दोपहर में आयोजित तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इसमें भूषण गुप्ता (मुंबई), डॉ. आडुरी कैटना हर्नांडेज (GIZ), प्रो. विनोद तारे, प्रभात सिंह (आईआईटी बीएचयू), वेंकटेश वट्टा (भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) तथा अशोक कुमार सिंह (इंजीनियर-इन-चीफ, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश) शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने भूजल स्तर में लगातार गिरावट, नदियों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही जल संरक्षण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

सुझावों को कार्ययोजना में किया जाएगा शामिल

समापन सत्र में संगोष्ठी के दौरान प्राप्त सुझावों और संस्तुतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने इन सुझावों को भविष्य की कार्ययोजना में शामिल करने का निर्णय लिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

“स्वच्छ गंगा – सुरक्षित भविष्य” के संकल्प के साथ आयोजित यह संगोष्ठी जल संरक्षण और नदी पुनरुद्धार के क्षेत्र में जनजागरूकता बढ़ाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

[acf_sponsor]