नोएडा: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को भारत सरकार से एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है। इसके बाद एयरपोर्ट अब तकनीकी रूप से वाणिज्यिक उड़ानों के लिए तैयार हो गया है। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) क्रिस्टोफ श्नेलमैन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें यह लाइसेंस सौंपा।
सुरक्षा मंजूरी के बाद तय होगी उड़ानों की तारीख
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में एयरपोर्ट परियोजना की मौजूदा प्रगति और अगले चरणों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब केवल ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार है।
जैसे ही यह मंजूरी मिल जाएगी, एयरपोर्ट प्रबंधन उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की तारीख घोषित कर देगा। संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन कर सकते हैं।
चार चरणों में होगा एयरपोर्ट का विकास
जेवर में बन रहा यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट चार चरणों में विकसित किया जा रहा है।
- पहले चरण में सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी।
- दूसरे चरण में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक किया जाएगा।
- तीसरे और चौथे चरण के पूर्ण विस्तार के बाद एयरपोर्ट की क्षमता 7 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
कार्गो संचालन की शुरुआत में 2.5 लाख टन क्षमता होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख टन तक किया जाएगा।
अत्याधुनिक तकनीक और ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीकों से लैस बनाया जा रहा है। यहां यात्रियों को डिजीयात्रा (DigiYatra), बायोमेट्रिक सिस्टम और सेल्फ बैगेज ड्रॉप जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
साथ ही यह एयरपोर्ट ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ तैयार किया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं शामिल होंगी।
पश्चिमी यूपी के विकास को मिलेगा नया इंजन
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना जेवर और आसपास के क्षेत्रों को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।




