UGC के नए नियमों पर यूपी की राजनीति गरम: बृजभूषण बोले– अध्ययन के बाद ही रखूंगा पक्ष, बेटे प्रतीक ने बताया सामान्य वर्ग के खिलाफ साजिश

बृजभूषण शरण सिंह

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नए नियमों पर जहां पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने फिलहाल संयम बरतने की बात कही है, वहीं उनके बेटे और गोंडा सदर से विधायक Prateek Bhushan Singh ने इसे खुलकर सामान्य वर्ग के खिलाफ साजिश करार दिया है।

UGC पर बृजभूषण का संतुलित रुख

यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवाल किए जाने पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह विषय गंभीर और समाज से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पूरी जानकारी और अध्ययन के वह कोई भी बयान नहीं देंगे।

बृजभूषण ने कहा, “यूजीसी एक बड़ा विषय है। मैं इसे समझ रहा हूं। जो भी बोलूंगा, सोच-समझकर बोलूंगा। यह ऐसा मुद्दा है जिसमें सभी वर्गों के बीच सामंजस्य निकलना जरूरी है।”

प्रतीक भूषण का तीखा हमला

वहीं दूसरी ओर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए यूजीसी के नए नियमों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने लिखा कि भारतीय समाज के एक वर्ग को लगातार “ऐतिहासिक अपराधी” के रूप में पेश किया जा रहा है और वर्तमान में उसे प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।
प्रतीक का कहना है कि इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गंभीर विमर्श होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के अत्याचारों को अतीत की बात कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को आज भी दोषी ठहराया जा रहा है।

विरोध के पीछे छात्रों और शिक्षकों के तीन बड़े तर्क

UGC के इन नियमों का विरोध कर रहे छात्रों और शिक्षकों की ओर से तीन प्रमुख आपत्तियां सामने आ रही हैं—
शिकायतकर्ता के खिलाफ गलत शिकायत पर कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं होने से सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के खिलाफ झूठे मामलों की आशंका।
इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के अनिवार्य प्रतिनिधित्व का प्रावधान नहीं, जिससे पक्षपाती फैसलों का डर।
नियम लागू होते ही सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से ही शोषक या अपराधी की श्रेणी में खड़ा किए जाने की भावना।

क्या है UGC का ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026’

एससी-एसटी की तरह अब ओबीसी छात्रों को भी जातिगत भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी।
हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक समर्पित इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य होगा।
एक विशेष समिति गठित की जाएगी, जिसमें ओबीसी, एससी-एसटी, महिला और दिव्यांग प्रतिनिधि शामिल होंगे।
यह समिति हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट यूजीसी को सौंपेगी।
यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो चुकी है और उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है।

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