टक्साल गोलीकांड: फैसले से पहले वायरल हुई 22 साल पुरानी ‘अखबार की कटिंग’

4 अक्टूबर 2002 को वाराणसी में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफिले पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत की सुनवाई पूरी हो चुकी है। जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है, और इसी बीच 2002 के एक अखबार की वह पुरानी कटिंग तेजी से वायरल हो रही है, जिसने उस दौर के खौफनाक संघर्ष की यादें ताजा कर दी हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध के गठजोड़ के सबसे चर्चित मामलों में से एक, वाराणसी का ‘टक्साल गोलीकांड’ एक बार फिर चर्चा में आ गया है। 22 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और किसी भी दिन फैसला सुनाया जा सकता है। फैसले की इस सुगबुगाहट के बीच इंटरनेट और सोशल मीडिया पर साल 2002 के एक अखबार की पुरानी ‘पेपर कटिंग’ तेजी से वायरल हो रही है।

क्या है वायरल ‘पेपर कटिंग’ में?

सोशल मीडिया पर 13 अक्टूबर 2002 की जो अखबार की कटिंग वायरल हो रही है, उसमें छपी तस्वीर में अभय सिंह और उसके साथी अवैध पिस्तौलों और राइफलों के साथ पुलिस की गिरफ्त में नजर आ रहे हैं।

खबर के अंश उस दौर के हालात बयां कर रहे हैं। कटिंग में लिखा है:

“धनंजय पर हमला करने वाला अभय सिंह शूटरों समेत…” इन आरोपियों को उस वक्त कानपुर पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत दबोचा था, जब ये किसी घटना को अंजाम देने या भागने की फिराक में थे।

वर्चस्व और ठेकेदारी की जंग: क्या था टक्साल गोलीकांड?

पूर्वांचल में ठेकेदारी, रेलवे के टेंडर और वर्चस्व को लेकर गुटों के बीच अक्सर विवाद होते रहे हैं। टक्साल गोलीकांड भी इसी वर्चस्व की जंग का नतीजा था।

4 अक्टूबर 2002 की शाम, वाराणसी कैंट के भीड़भाड़ वाले नदेसर इलाके में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफिले पर अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस दुस्साहसिक हमले में धनंजय सिंह, उनके सरकारी गनर और ड्राइवर समेत कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस पूरे हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का मुख्य आरोप अभय सिंह और उसके साथियों पर लगा था।

जेल अफसर की हत्या की भी थी साजिश

वायरल हो रही अखबार की कटिंग के अनुसार, अभय सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए थे। सूत्रों का दावा था कि अभय सिंह और उसके साथी सिर्फ धनंजय सिंह पर हमले तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने एक जेल अफसर को भी ठिकाने लगाने की योजना बना ली थी।

उस समय के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) आर.पी. सिंह ने मीडिया को जानकारी दी थी कि हत्या, रंगदारी, वसूली और खून-खराबे के दो दर्जन से अधिक मामलों के आरोपी अभय ने पूछताछ में बताया था कि वह इलाहाबाद (अब प्रयागराज) जा रहा था, तभी पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में अभय ने कई अहम जानकारियां दी थीं, जिसके आधार पर उस समय कुछ और लोगों के पकड़े जाने की सम्भावना जताई गई थी।

अब सभी की निगाहें फैसले पर

दो दशकों से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, अब इस बहुचर्चित मामले में अदालत का फैसला आने वाला है। इस पुरानी अखबार की कटिंग का अचानक वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि यूपी की सियासत में दिलचस्पी रखने वाले लोग इस घटना को आज भी भूले नहीं हैं। अब देखना यह है कि अदालत इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाती है।

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