प्रयागराज: माघ मेला 2026 में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) के दिन हुई घटना के बाद प्रशासन ने 48 घंटे के अंदर उन्हें दूसरा कड़ा नोटिस जारी किया है। नोटिस में बैरियर तोड़ने, बिना अनुमति बग्घी (पालकी/रथ) से भीड़ में संगम की ओर जाने का आरोप लगाया गया है, जिससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया था।
क्या है पूरा मामला?
- मौनी अमावस्या पर घटना: इस पवित्र स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ बग्घी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। मेला प्रशासन ने आपातकालीन उपयोग के लिए रिजर्व पांटून पुल नंबर-2 पर लगाए बैरियर को तोड़ने और बिना अनुमति वाहन से भीड़ भरे मार्ग पर प्रवेश करने का आरोप लगाया है। उस समय संगम क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु मौजूद थे, जिससे व्यवस्था बिगड़ने और भगदड़ का जोखिम बढ़ गया।
- प्रशासन का आरोप: नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि उनके इस कृत्य से मेला की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई। इमरजेंसी सेवाओं के लिए आरक्षित पुल पर केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी, लेकिन नियम तोड़े गए।
- दूसरा नोटिस और चेतावनी: प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ‘श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ सहारनपुर’ और ‘बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर मनकामेश्वर मंदिर’ के नाम पर नोटिस चिपकाया। इसमें पूछा गया है कि क्यों न आपको माघ मेले में हमेशा के लिए प्रवेश से प्रतिबंधित (बैन) कर दिया जाए। साथ ही, संस्था को दी गई जमीन, शिविर सुविधाएं और अन्य व्यवस्थाएं निरस्त करने की धमकी दी गई है।
- समय सीमा: नोटिस में 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष
स्वामी जी के मीडिया प्रभारी और शिष्यों का कहना है कि यह कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। वे पहले से ही शंकराचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए प्रशासन पर अपमान और अवमानना का आरोप लगा चुके हैं। मौनी अमावस्या पर उन्हें स्नान से रोके जाने के बाद उन्होंने धरना दिया था और सम्मान की मांग की थी।
मेला में तनाव का माहौल
यह विवाद माघ मेले की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे अन्य संतों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है, कुछ ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है। मेला क्षेत्र में भारी भीड़ के बीच ऐसे टकराव से श्रद्धालुओं में असंतोष बढ़ सकता है।




