उत्तर प्रदेश के कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बौद्ध पर्यटन के लिए वैश्विक गेटवे के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन हकीकत में यह परियोजना अब ‘सफेद हाथी’ बनती दिख रही है। इंडिया टुडे द्वारा दाखिल RTI (सूचना का अधिकार) आवेदन से सामने आया है कि वर्ष 2023 के बाद से यहां से एक भी निर्धारित व्यावसायिक उड़ान संचालित नहीं हुई है।
अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 327 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। उद्देश्य था कुशीनगर को लुंबिनी, सारनाथ और बोधगया जैसे प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना। उद्घाटन के समय श्रीलंका सहित कई देशों से बौद्ध भिक्षु और नेता पहुंचे थे, लेकिन दो साल बाद स्थिति बिल्कुल उलट है।
मेंटेनेंस खर्च में तेज उछाल, उड़ानें शून्य
- RTI के मुताबिक, उड़ानों के अभाव के बावजूद एयरपोर्ट के रख-रखाव पर खर्च लगातार बढ़ता गया।
- 2021-22 में वार्षिक मेंटेनेंस खर्च 135 लाख रुपये था।
- 2024-25 तक यह खर्च बढ़कर 342 लाख रुपये हो गया, यानी करीब 152% की बढ़ोतरी।
- यह आंकड़े कर्मचारियों के वेतन को शामिल किए बिना हैं, जिससे वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक बैठता है।
- RTI डेटा: 2024 और 2025 में एक भी तय उड़ान नहीं
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने RTI के जवाब में बताया कि नवंबर 2023 के बाद से कोई भी कमर्शियल फ्लाइट नहीं चली।वर्ष 2024 और 2025 में निर्धारित उड़ानों की संख्या शून्य रही।
मार्च 2022 में सबसे अधिक 54 उड़ानें दर्ज की गई थीं, जिसके बाद आंकड़े लगातार गिरते चले गए।
आखिरी बार नवंबर 2023 में केवल 6 उड़ानों की लैंडिंग हुई थी।
नवंबर 2025 में दिखी हलचल, वजह धार्मिक आयोजन
RTI रिकॉर्ड में नवंबर 2025 के दौरान अचानक 50 चार्टर्ड उड़ानों का उल्लेख मिलता है। हालांकि यह कोई नियमित सेवा नहीं थी। दरअसल, कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत ज्ञानेश्वर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 40 देशों से भिक्षु और श्रद्धालु पहुंचे थे, जिनके लिए विशेष विमान उतरे थे।
सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का पक्ष
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि स्पाइसजेट ने नवंबर 2023 तक दिल्ली–कुशीनगर रूट पर उड़ानें संचालित की थीं, लेकिन विमानों की कमी के चलते सेवाएं बंद करनी पड़ीं।
मंत्रालय के अनुसार, एयरपोर्ट को अब नाइट लैंडिंग (IFR) सुविधा के लिए अपग्रेड कर दिया गया है, लेकिन फिलहाल किसी भी एयरलाइन ने स्लॉट के लिए आवेदन नहीं किया है।हालांकि, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च 2026 से दिल्ली–कुशीनगर उड़ानें शुरू करने में रुचि जताई है। इसके अलावा आगरा, बरेली और गया जैसे नए रूट्स पर भी बातचीत चल रही है।
भारी निवेश, सीमित उपयोग
जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट निर्माण पर कुल 327.30 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें 125 करोड़ रुपये AAI और 202 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश सरकार ने दिए। इसके बावजूद मौजूदा समय में यह बुनियादी ढांचा मुख्य रूप से वीआईपी या चार्टर्ड विमानों तक ही सीमित रह गया है




