नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलावों के संकेत मिलने लगे हैं। सत्ता और विपक्ष—दोनों खेमों में रणनीतियां तेज हो गई हैं। मकर संक्रांति के बाद योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा है, वहीं विपक्षी दल 2027 के चुनाव से पहले अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।
पहली बड़ी हलचल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को लेकर है। मकर संक्रांति के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही बीजेपी ओबीसी प्लस और हिंदुत्व के नए फॉर्मूले पर काम कर रही है, ताकि जातीय संतुलन को साधा जा सके और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को नए रूप में पेश करने की तैयारी में हैं। 2026 में ‘पीडीए प्लस’ के तहत सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों को जोड़ने की कोशिश तेज हो गई है। अयोध्या से बलिया तक पार्टी में ब्राह्मण चेहरों को आगे लाया जा रहा है। माना जा रहा है कि बिहार के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का असर यूपी की राजनीति पर भी दिख सकता है। हालांकि राज्यसभा की 10 सीटों और पंचायत चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव के संकेत भी सामने आ रहे हैं।
तीसरी और सबसे अहम सियासी चर्चा बहुजन समाज पार्टी से जुड़ी है। 2026 को बसपा के लिए संगठन और अस्तित्व के लिहाज से अहम साल माना जा रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती इस साल कुछ कड़े और निर्णायक फैसले ले सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की ओर से गठबंधन का एक ‘सीक्रेट ऑफर’ भेजा गया है। कांग्रेस के भीतर एक धड़ा मानता है कि सपा की बजाय बसपा के साथ जाने से दलित–मुस्लिम समीकरण ज्यादा मजबूत हो सकता है। संगठन को धार देने के लिए मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को प्रदेश में सक्रिय भूमिका दे सकती हैं।
इन्हीं राजनीतिक चर्चाओं के बीच कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक मामला भी सुर्खियों में है। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर ड्यूटी के दौरान ब्रह्मनाल चौकी प्रभारी दरोगा अभिषेक त्रिपाठी के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया है। आरोप है कि नो-एंट्री जोन में बाइक ले जाने से रोकने पर बीजेपी पार्षद के बेटे हिमांशु श्रीवास्तव ने बीच सड़क दरोगा को थप्पड़ मारे। घटना 1 जनवरी की बताई जा रही है, जिसमें पुलिसकर्मी किसी तरह अपनी जान बचा सका।
राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव और पंचायत चुनाव यह तय करेंगे कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में कौन किसके साथ खड़ा होगा और किसकी रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।



