यूपी में SIR के बाद कटे करोड़ों वोट, चुनाव आयोग ने जारी कर दी ड्राफ्ट सूची, इसमें अपना नाम ऐसे चेक करें

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची की जांच करते मतदाता और चुनाव आयोग से जुड़े दस्तावेज़

उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ के करीब मतदाताओं के नाम कटे! जानें क्यों 15 करोड़ से घटकर 12 करोड़ रह गई संख्या. अपना नाम ड्राफ्ट लिस्ट में कैसे चेक करें, फॉर्म-6 भरने की आखिरी तारीख और पोलिंग स्टेशनों के नए नियमों की पूरी जानकारी यहां देखें.

UP News: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद प्रदेश की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस बार की गणना में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. यूपी में जहां पहले मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ के पार थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 12 करोड़ रह गई है. चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं लौटे. यानी ड्राफ्ट सूची में इतने वोटर्स के नाम शामिल नहीं है.

जरूरी तारीखें: नोट कर लें 6 फरवरी और 6 मार्च
6 जनवरी: नोटिस की प्रक्रिया शुरू हो रही है. जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा.
6 फरवरी: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख.
6 मार्च: मतदाता सूची का अंतिम (Final) प्रकाशन होगा.
लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?
अगर ड्राफ्ट लिस्ट में आपका नाम नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आपको नीचे दिए गए काम करने होंगे:

नाम जुड़वाने के लिए: फॉर्म-6 भरें (नए मतदाता या जिनका नाम कट गया है).
नाम कटवाने के लिए: फॉर्म-7 भरें (मृतक या बाहर रह रहे लोगों के लिए).
संशोधन या पता बदलने के लिए: फॉर्म-8 भरें.
एनआरआई (NRI) कोटा: विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक भी अपने पासपोर्ट एड्रेस वाले पोलिंग स्टेशन पर नाम दर्ज करा सकते हैं, बशर्ते वे चुनाव के दिन भारत में मौजूद हों.
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे चेक करें?

क्यों कटे करोड़ों लोगों के नाम?


चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए चलाए गए इस अभियान में बड़ी संख्या में अपात्र नाम हटाए गए हैं. नाम कटने की मुख्य वजहें ये बताई गईं-

मृतक मतदाता: लगभग 46.23 लाख लोगों के नाम मृत्यु के कारण हटाए गए.
स्थानांतरित: करीब 2.17 करोड़ मतदाता दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो गए थे.
डुप्लीकेट नाम: लगभग 25.47 लाख ऐसे नाम मिले जो एक से ज्यादा पोलिंग स्टेशनों पर दर्ज थे.
गौर करने वाली बात यह है कि 15 करोड़ मतदाताओं में से केवल 12 करोड़ (करीब 81%) लोगों ने ही गणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करके वापस दिए, जबकि 18% लोगों ने फॉर्म वापस नहीं किए.
चुनाव आयोग का नया नियम: पोलिंग स्टेशनों में बदलाव
यूपी के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा वोटर नहीं रहेंगे. पहले यह सीमा 1500 मतदाताओं की थी. इस कारण उत्तर प्रदेश में कई नए पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं. इस प्रक्रिया और ड्राफ्ट तैयार करने में आयोग को 6 दिन का अतिरिक्त समय लगा.

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