देवरिया जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर 1 जनवरी 2026 से आमरण अनशन पर हैं। वे दिसंबर 2025 में शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से गिरफ्तारी के समय की CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) उपलब्ध न कराने का विरोध कर रहे हैं। 1999 के औद्योगिक प्लॉट धोखाधड़ी मामले में आरोपी ठाकुर इसे प्रक्रिया में खामी बता रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की देवरिया जिला जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने अपनी गिरफ्तारी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल उठाते हुए आमरण अनशन शुरू कर दिया है। वे 1 जनवरी 2026 से भूख हड़ताल पर हैं और मांग कर रहे हैं कि दिसंबर 2025 में शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के अंदर हुई उनकी गिरफ्तारी की CCTV फुटेज और संबंधित कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) उन्हें मुहैया कराए जाएं।
ठाकुर का कहना है कि बार-बार मांगने के बावजूद अधिकारियों ने ये महत्वपूर्ण सबूत नहीं दिए, जिससे गिरफ्तारी में पारदर्शिता की कमी झलकती है। अदालत परिसर में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भी सबूत मांगे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब तक फुटेज नहीं मिलेगी, अनशन जारी रहेगा।
यह मामला 1999 का है, जब ठाकुर देवरिया के एसपी थे। उन पर आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से औद्योगिक प्लॉट हासिल किया गया। सितंबर 2025 में लखनऊ में एफआईआर दर्ज हुई और 10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर में ट्रेन से उन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में देवरिया कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
ठाकुर के वकीलों ने जमानत अर्जी में प्रक्रियागत खामियां और सबूत न देने का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस ने भी उनका समर्थन किया है, इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया जा रहा है। अनशन जारी रहने से ठाकुर की सेहत पर नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि जांच जारी है।




