वाराणसी के मणिकर्णिका घाट जहां सदियों से अंतिम संस्कार होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है इन दिनों बड़े पैमाने पर कायाकल्प और पुनर्विकास के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत शुरू हुई इस परियोजना में घाट को आधुनिक, सुविधाजनक और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर बनाने का काम चल रहा है। लेकिन विकास कार्य के दौरान बुलडोजर चलने से सियासी विवाद भी गरमा गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सदियों पुरानी मूर्तियां, खासकर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और ऐतिहासिक चबूतरे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि सरकार इसे भ्रम फैलाने की साजिश बता रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि कुछ लोग काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई मंदिर या मूर्ति नहीं तोड़ी गई – पुरानी संरचनाओं को संरक्षित कर नई जगह पर रखा जा रहा है, और कुछ वायरल तस्वीरें एआई से बनी हैं। प्रशासन का कहना है कि घाट का काम चार चरणों में हो रहा है, और सभी धार्मिक वस्तुओं को संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित रखा गया है।
इस बीच, परियोजना की तस्वीरें सामने आई हैं जो दिखाती हैं कि कायाकल्प के बाद काशी का ‘महाश्मशान’ कैसा दिखेगा – अधिक व्यवस्थित, साफ-सुथरा, बेहतर सुविधाओं वाला और श्रद्धालुओं के लिए सुगम। 35 करोड़ रुपये के पहले चरण में घाट को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और अधिक सम्मानजनक हो सके।
विपक्ष का कहना है कि विकास के नाम पर धार्मिक विरासत को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, जबकि सरकार इसे काशी की गरिमा बढ़ाने का प्रयास बता रही है।




