UP News: प्रयागराज महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए अपनी आंखों की खूबसूरती से सोशल मीडिया पर चर्चा में आईं ‘मोनालिसा’ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी शादी है। मोनालिसा ने केरल के एक मंदिर में बागपत के फरमान से शादी कर ली है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर ‘लव जिहाद’ की बहस तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि फरमान उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के पलड़ा गांव का रहने वाला है और मुस्लिम जाट परिवार से ताल्लुक रखता है। फरमान पिछले करीब 13 साल से दिल्ली और मुंबई में रहकर एक्टिंग और फिल्मों से जुड़ा काम कर रहा है।
फरमान के पिता ने जताई नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फरमान के पिता इस शादी से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि शादी केवल दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों का रिश्ता होता है और फरमान ने दूसरे धर्म में शादी करके गलत कदम उठाया है।
‘लव जिहाद’ का आरोप या आपसी प्यार?
फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने इस शादी को ‘लव जिहाद’ बताते हुए दावा किया है कि मोनालिसा को ट्रैप किया गया है। वहीं केरल में मौजूद इस जोड़े का कहना है कि यह एक इंटरफेथ मैरिज है और दोनों ने अपना-अपना धर्म नहीं बदला है।
मोनालिसा का दावा है कि उनका परिवार उनके साथ है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में परिवार की नाराजगी की भी बात सामने आई है। सोशल मीडिया पर इस शादी को लेकर तीखी बहस जारी है।
अंसारी परिवार को बड़ी राहत, 23 दुकानें होंगी मुक्त
गाजीपुर में गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के परिवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। जिला प्रशासन द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों के मामले में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।
मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 23 दुकानों और जमीन को कुर्क करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रशासन को इन दुकानों को तत्काल मुक्त करने का निर्देश दिया है।
अंसारी परिवार का लंबे समय से दावा रहा है कि प्रशासन ने उनकी कई वैध संपत्तियों को भी गलत तरीके से कुर्क कर लिया था।
अफजाल अंसारी के पुराने बयान की फिर चर्चा
अंसारी परिवार की संपत्तियों पर सरकार की कार्रवाई के बीच अफजाल अंसारी का एक पुराना बयान अब फिर चर्चा में आ गया है।
अफजाल अंसारी ने पहले कहा था कि सत्ता की मशीनरी का दुरुपयोग कर उनकी संपत्तियों को छीना गया है और वे कानून के रास्ते से अपनी “एक-एक इंच जमीन” वापस लेंगे।
अदालत के ताजा फैसले के बाद उनके इस दावे को बल मिला है। हालांकि लखनऊ और अन्य जगहों पर अंसारी परिवार की कई संपत्तियां अभी भी सरकारी नियंत्रण में हैं और उन्हें वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी है।




