लखनऊ में खत्म होगी शंकराचार्य की यात्रा, परमिशन की शर्तों पर सियासत तेज; अखिलेश यादव का तंज

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गौ प्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध यात्रा को लेकर Swami Avimukteshwaranand Saraswati लगातार चर्चा में बने हुए हैं। कई दिनों से चल रही यह यात्रा आज Lucknow में समाप्त होने जा रही है। यात्रा के समापन पर बड़े कार्यक्रम की तैयारी है, लेकिन प्रशासन की अनुमति और उस पर लगी शर्तों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ कई शर्तें भी लगाई गई हैं। इन्हीं शर्तों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि इतनी शर्तें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या कोविड-19 अभी भी चल रहा है? अगर ऐसा है तो सरकार और भाजपा के कार्यक्रमों में आखिरी बार इसका पालन कब हुआ, इसका प्रमाण दिया जाए।

उन्होंने भाजपा पर सनातन का सम्मान न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम अपमान भी न करें। अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि सरकार की नीतियों से समाज का एक वर्ग नाराज है और आने वाले चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कार्यक्रम पर लगाई गई शर्तों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शर्तें लगाना दैत्यों और दानवों का पुराना तरीका रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे 26 शर्तें हों या 260, इससे आंदोलन नहीं रुकेगा।

शंकराचार्य ने सरकार पर आरोप लगाया कि गौ माता की रक्षा को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि गौ माता को राज्य माता घोषित करने के लिए सरकार को 40 दिन का समय दिया गया था, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ।

फिलहाल लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम और उस पर लगी शर्तों को लेकर सियासत तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यात्रा के समापन कार्यक्रम में क्या संदेश निकलकर सामने आता है और इसका राजनीतिक असर क्या होता है।

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