युवराज मेहता मौत केस: ग्रेटर नोएडा में दो और बिल्डर गिरफ्तार, पुलिस की कार्रवाई तेज

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। इस प्रकरण में अब दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने लॉट्स ग्रीन प्रोजेक्ट से जुड़े बिल्डर रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को हिरासत में लिया है। इससे पहले बुधवार को इस मामले में कुल पांच बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

वराज मेहता की मौत के बाद से प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों की ओर से नोएडा अथॉरिटी से लेकर जिला प्रशासन तक पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच ग्रेटर नोएडा पुलिस ने निर्माण में अनियमितताओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बिल्डरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

इससे पहले विश टाउन प्रोजेक्ट के बिल्डर अभय कुमार को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया

युवराज मेहता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उनकी मौत फेफड़ों में पानी भरने और हार्ट फेल होने के कारण हुई। रिपोर्ट के अनुसार, उनके फेफड़ों में करीब 1 से 2 लीटर पानी भरा हुआ था। आशंका जताई गई है कि वह कई घंटों तक पानी में फंसे रहे।


घटना कैसे हुई

इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। वह शुक्रवार देर रात ग्रेटर नोएडा पहुंचे थे। घने कोहरे के कारण उनकी कार से नियंत्रण हट गया और वाहन एक नाले की दीवार तोड़ते हुए निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरा। बेसमेंट में पानी भरा होने के कारण कार पूरी तरह डूब गई और गाड़ी के दरवाजे बंद हो जाने से युवराज अंदर ही फंस गए।
बताया गया है कि युवराज ने घटना के दौरान अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। सूचना मिलने पर पुलिस, एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवराज करीब 45 मिनट तक बचाने की गुहार लगाते रहे।

युवराज के पिता का आरोप है कि रेस्क्यू टीम ने पानी में उतरने से परहेज किया। उनका कहना है कि टीम को ठंडे पानी और अंदर लोहे की सरिया होने का डर था, जिसके चलते बचाव कार्य में देरी हुई।

प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को पद से हटा दिया है। इसके साथ ही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस एसआईटी में एडीजी जोन मेरठ, मेरठ मंडलायुक्त और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम का नेतृत्व एडीजी जोन मेरठ कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस और एसआईटी दोनों स्तर पर जांच जारी है और युवराज मेहता की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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