संभल में जज के ट्रांसफर पर मचा बवाल, वकीलों का जोरदार विरोध प्रदर्शन
संभल जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर जिले में सियासी और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। जज विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर स्थानांतरित किए जाने के बाद संभल में वकीलों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। बुधवार को बड़ी संख्या में वकील न्यायालय परिसर के बाहर इकट्ठा हुए और ट्रांसफर के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने “CJM साहब को वापस लाओ” जैसे नारे लगाए और तबादले को लेकर सवाल उठाए। वकीलों का कहना है कि जज का स्थानांतरण ऐसे समय में किया गया है, जब उन्होंने एक संवेदनशील मामले में अहम आदेश पारित किया था।
ASP अनुज चौधरी के खिलाफ FIR के आदेश के बाद हुआ तबादला
गौरतलब है कि CJM विभांशु सुधीर ने नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा के मामले में CO/ASP अनुज चौधरी समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के कुछ ही दिनों बाद उनका तबादला कर दिया गया, जिसे लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है।
तबादले के बाद से ही जज विभांशु सुधीर चर्चा के केंद्र में हैं और इसे न्यायिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने जताई चिंता, सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील
इस मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जज के तबादले पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा,“मुझे उम्मीद है कि संभल मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट स्वयं संज्ञान लेंगे। देश के जितने भी बुद्धिजीवी और न्यायाधीश हैं, वे भी इस पर ध्यान देंगे। यह हमारे या आपके चर्चा की नहीं, बल्कि संस्थागत संज्ञान की बात है।”
अखिलेश यादव के बयान के बाद यह मुद्दा प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
कानूनी और सियासी हलकों में बढ़ी हलचल
जज के तबादले और उस पर वकीलों के विरोध के चलते संभल का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और न्यायिक बहस का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस पर उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिक्रिया को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




