ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत: सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक चूक का दर्दनाक उदाहरण

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में खुला नाला, जहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हुई,

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को अब एक सामान्य हादसा मानना मुश्किल है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की अपूरणीय क्षति है, बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता की भी खुली तस्वीर पेश करती है।

मौके पर मौजूद रहे लोग, फिर भी नहीं बची जान

हैरानी की बात यह रही कि घटना के समय आसपास स्थानीय लोग भी मौजूद थे और पुलिस व रेस्क्यू टीमें भी मौके पर पहुंच चुकी थीं। इसके बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। नतीजा यह हुआ कि एक युवा अपनी जान गंवा बैठा, जबकि हालात बताते हैं कि यदि तत्परता दिखाई जाती तो उसे बचाया जा सकता था।

खुले नाले और सुरक्षा इंतजामों की कमी

घटनास्थल पर खुले नाले, न तो कोई बैरिकेडिंग और न ही चेतावनी बोर्ड लगे हुए थे। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की यह कमी सवाल खड़े करती है। सेक्टर-150 जैसे विकसित क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस घटना को रोका जा सकता था। जवाब साफ है—हां। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते और रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी दिखाई जाती, तो शायद आज युवराज मेहता जीवित होता।

जवाबदेही की मांग तेज

स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों की मांग है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए खुले नालों को कवर करने और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

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