प्रयागराज के माघ मेले में चल रहे मौनी अमावस्या स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ (ज्योतिर्मठ, बद्रीनाथ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। यह मामला धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गरमा गया है, जिसमें शंकराचार्य, मेला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और विभिन्न हिंदू संगठनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
विवाद की शुरुआत और मुख्य घटना
माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या (18-19 जनवरी 2026) पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ पालकी और रथ पर सवार होकर संगम तट पहुंचे। परंपरा के अनुसार वे ‘छत्र’ और अन्य धार्मिक प्रतीकों के साथ स्नान करने जा रहे थे। लेकिन मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। आरोप है कि भीड़ प्रबंधन के नाम पर उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, छत्र तोड़ा गया और मारपीट की गई।
इससे नाराज शंकराचार्य ने संगम स्नान का बहिष्कार कर दिया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने मेला अधिकारियों से लिखित माफी की मांग की और कहा कि बिना माफी के वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। शंकराचार्य ने इसे अपनी आस्था और सम्मान पर हमला बताया।
मेला प्रशासन का नोटिस और कानूनी आधार
विवाद बढ़ने के बाद माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को औपचारिक नोटिस जारी किया। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया कि वे अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग कैसे कर रहे हैं। नोटिस में कहा गया कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक और नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए कोई भी व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता। 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील (सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता) ने 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजा, जिसमें नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया। उन्होंने दावा किया कि पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को हो चुका है और अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य उन्हें मान्यता देते हैं।
यह विवाद पुराना है ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर 1941 से कानूनी लड़ाई चल रही है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बीच असमंजस है।
राकेश टिकैत का बयान और राजनीतिक कूद
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक वायरल वीडियो में शंकराचार्य का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, “महाराज जी को घुमा दो। शंकराचार्य जी अगर बगैर स्नान के आएंगे तो पाप चढ़ेगा। सरकार पर भारी पड़ेगा। ये तानाशाही सरकार है। सवाल पूछने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।”
यह बयान विवाद को राजनीतिक रंग दे रहा है, क्योंकि टिकैत परिवार पहले से ही यूपी सरकार की आलोचना करता रहा है।
प्रवीण तोगड़िया का बयान
हिंदूवादी नेता और पूर्व विश्व हिंदू परिषद नेता प्रवीण तोगड़िया ने भदोही में बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे पूरे मामले से बेहद दुखी हैं, लेकिन “हिंदू बंटेगा तो कटेगा”। तोगड़िया ने दोनों पक्षों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामला शांत करने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों संत मिलकर हिंदू एकता और सम्मान का रास्ता ढूंढेंगे। तोगड़िया ने सुझाव दिया कि हिंदुओं को एकजुट रखने के लिए दोनों पूजनीय संत मिलकर मामला सुलझाएं।
अन्य प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
- अखिल भारत हिंदू महासभा (मेरठ) ने बैठक कर शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार की निंदा की और इसे यूपी सरकार की छवि खराब करने की साजिश बताया।
- अयोध्या के कुछ संतों ने भी सरकार को बदनाम करने की कोशिश करार दिया।
- कांग्रेस ने भी प्रशासन पर सवाल उठाए, लेकिन मामला मुख्य रूप से धार्मिक और हिंदू संगठनों में केंद्रित है।
यह विवाद माघ मेले की शांति को प्रभावित कर रहा है और आगे सुप्रीम कोर्ट या उच्च स्तर पर जा सकता है। हिंदू समाज में एकता बनाए रखने की अपील बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन नियमों का हवाला दे रहा है।




