बलिया जिले के फेफना रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों (गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस और छपरा-फर्रुखाबाद उत्सर्ग एक्सप्रेस) के ठहराव की शुरुआत के कार्यक्रम में बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय मुख्य अतिथि न बनाए जाने से बेहद नाराज हो गए और खुले मंच से यूपी सरकार के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ को कड़ी धमकी दी। उन्होंने कहा, “मैं बूढ़ा जरूर हूं, लेकिन मन का बूढ़ा नहीं हूं। मन करता है मंत्री को मंच से उठाकर फेंक दूं!” साथ ही अधिकारियों पर भी तीखा हमला बोला – “जो अधिकारी काम नहीं करेगा, वह जूता खाएगा। मुकदमा करना है तो कर लो, मैं झेलने को तैयार हूं। मैं सरकार या उसके नुमाइंदों के सामने झुकने वाला नहीं हूं।”
दरअसल, रेलवे प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद की जगह बलिया के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र को मुख्य अतिथि बनाया गया था, क्योंकि रेल मंत्री का पत्र इसी नाम पर आया था। इससे सनातन पांडेय काफी आहत हुए और उन्होंने इसे सरकार की तरफ से समाजवादी पार्टी के प्रति प्रतिशोध बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र या राज्य की कोई भी परियोजना हो, उसका मुख्य अतिथि स्थानीय सांसद होता है – चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का। उन्होंने रेलवे के गोरखपुर महाप्रबंधक को फोन कर कानून और आदेश दिखाने की चुनौती दी और कहा कि अगर नहीं दिखाएंगे तो “दो-दो हाथ” करने को तैयार हूं।
इस बीच, कार्यक्रम में मंत्री दयाशंकर मिश्र मुख्यमंत्री की मीटिंग के कारण नहीं पहुंचे, जिससे विवाद और बढ़ गया। बीजेपी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सफाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ ट्रेन ठहराव का छोटा कार्यक्रम था, बड़ा रेलवे इवेंट नहीं। रेल मंत्री के पत्र के अनुसार ही मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया था। उन्होंने बताया कि सभी के प्रयासों से ट्रेनों का ठहराव संभव हुआ और भविष्य में बड़े कार्यक्रमों में लोकसभा सांसद ही मुख्य अतिथि होंगे।
सनातन पांडेय ने एक अलग कार्यक्रम में भी अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि उत्सर्ग और गोंदिया एक्सप्रेस के ठहराव के लिए लंबा आंदोलन हुआ, जिसमें वे खुद शामिल थे, लेकिन न मीडिया ने कवर किया और न प्रशासन ने श्रेय दिया। उन्होंने सरकार पर समाजवादी पार्टी के प्रति पक्षपात का आरोप लगाया।




