मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव इस समय सुलग रहा है। एक अनुसूचित जाति की महिला की नृशंस हत्या और उसकी बेटी के सनसनीखेज अपहरण ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। घटना के दूसरे दिन भी तनाव बरकरार है, जिसे देखते हुए गांव को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी, 20 इंस्पेक्टर और आरएएफ (RAF) की टुकड़ियां तैनात हैं, जबकि गांव की ओर आने वाले सभी रास्तों पर ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
दिल दहला देने वाली यह घटना गुरुवार सुबह की है। गांव की रहने वाली सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की तरफ जा रही थीं। आरोप है कि गांव के ही पारस सोम और उसके साथियों ने सुनीता पर फरसे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया और उनकी आंखों के सामने ही बेटी रूबी को अगवा कर फरार हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान सुनीता ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद से ही इलाके में भारी आक्रोश है।
जब बिलखते भाई ने पूछा- “बस इतना बता दो, मेरी बहन वापस आएगी या नहीं?”
शुक्रवार को गांव में उस समय हर आंख नम हो गई जब मृतका का बेटा नरसी, सपा विधायक अतुल प्रधान से लिपटकर रो पड़ा। उसके सवाल “विधायक जी, बस इतना बता दो कि मेरी बहन वापस आएगी या नहीं?” ने वहां मौजूद अधिकारियों और नेताओं को निशब्द कर दिया। परिवार ने साफ कर दिया था कि जब तक बेटी की बरामदगी नहीं होती, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में ‘वार-पलटवार’
इस घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया है। एक ओर विपक्षी दल सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहे हैं, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
- अतुल प्रधान का धरना: सपा विधायक अतुल प्रधान को जब पुलिस ने गांव की सीमा पर रोका, तो वे सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह मामला किसी दूसरे समुदाय का होता, तो क्या अब तक बुलडोजर नहीं चला होता?
- संजीव बालियान और संगीत सोम की एंट्री: पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान और पूर्व विधायक संगीत सोम भी मौके पर पहुंचे। भारी हंगामे के बीच प्रशासन और नेताओं की लंबी वार्ता हुई।
19 घंटे बाद समझौता: प्रशासन ने मानी ये शर्तें
काफी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद शुक्रवार रात करीब 8 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार किया जा सका। प्रशासन ने निम्नलिखित वादे किए हैं:
- 48 घंटे के भीतर अपहृत बेटी रूबी की सुरक्षित बरामदगी।
- परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक।
- परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी नौकरी।
- सुरक्षा के लिए गांव में पुलिस बल की तैनाती और परिवार को शस्त्र लाइसेंस।
पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपी
एसएसपी और जिलाधिकारी खुद मौके पर कैंप कर रहे हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी है। गांव में ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और पुलिस ने फ्लैग मार्च निकालकर शांति बनाए रखने की अपील की है।




