लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन, 905 शाखाएं बंद; ₹2500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

उत्तर प्रदेश में बैंकों में 5-डे वर्किंग सिस्टम लागू करने की मांग को लेकर बैंककर्मियों की हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर 27 जनवरी को प्रदेशभर के साथ लखनऊ में भी बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। चार दिन की लगातार छुट्टियों के बाद मंगलवार को लगातार पांचवें दिन बैंक शाखाएं नहीं खुल सकीं।

हड़ताल के चलते लखनऊ जिले की 905 बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे करीब ₹2500 करोड़ रुपये की क्लियरिंग प्रभावितहुई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लगभग 16 हजार अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल रहे।

हजरतगंज में प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

लखनऊ के हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक के मुख्यालय परिसर में बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन, धरना, रैली और सोशल मीडिया अभियानों के बावजूद सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है।

RBI और LIC में 5-डे वर्किंग, बैंकों से भेदभाव क्यों?

सभा को संबोधित करते हुए नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लॉइज (NCBE) के महामंत्री डी.के. सिंह ने कहा कि जब RBI, LIC, SEBI, NABARD और NPCI जैसे संस्थानों में 5 कार्य दिवस लागू हैं, तो बैंकों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने इसे बैंककर्मियों के साथ अन्याय बताया।

रोज 40 मिनट अतिरिक्त काम को तैयार

यूएफबीयू के प्रदेश संयोजक वाई.के. अरोड़ा ने बताया कि बैंककर्मी महीने में केवल 2–3 शेष शनिवारों की छुट्टी चाहते हैं और इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं। उन्होंने सरकार के रवैये को अड़ियल करार दिया।

5-दिवसीय बैंकिंग हमारा अधिकार

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने साफ कहा कि 5-दिवसीय बैंकिंग कोई मांग नहीं बल्कि बैंककर्मियों का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। नेताओं ने कहा कि बैंक हड़ताल से आम जनता को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की होगी।

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