वाराणसी के चर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में एक बार फिर अदालत की कार्यवाही तेज होती नजर आ रही है। करीब 24 साल पुराने इस मामले में शनिवार को पूर्व सांसद धनंजय सिंह वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए और अदालत में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
अपने आवेदन में धनंजय सिंह ने बचाव पक्ष के गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर सवाल उठाते हुए दोबारा जिरह करने की अनुमति मांगी। विशेष रूप से उन्होंने गोसाईंगंज से मौजूदा विधायक अभय सिंह से जुड़े गवाहों को लेकर पुनः जिरह की मांग की। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च तय कर दी है।
अदालत के निर्देश के अनुसार अगली तारीख पर एक लिखित गवाह को पेश किया जाएगा और उससे जुड़े सवाल-जवाब भी अदालत में दर्ज किए जाएंगे। इससे पहले इस मामले में कई गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। हाल ही में डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाषकर यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने अपना बयान दिया था, जिनकी जिरह की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
अदालत के निर्देश के अनुसार अगली तारीख पर एक लिखित गवाह को पेश किया जाएगा और उससे जुड़े सवाल-जवाब भी अदालत में दर्ज किए जाएंगे। इससे पहले इस मामले में कई गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। हाल ही में डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाषकर यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने अपना बयान दिया था, जिनकी जिरह की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
दरअसल यह मामला 4 अक्टूबर 2002 का है। उस समय धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सरकारी वाहन से वाराणसी से जौनपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर इलाके में टकसाल सिनेमा हॉल के पास उन पर हमला हुआ।
आरोप है कि बोलेरो वाहन में सवार अभय सिंह और उनके चार से पांच साथियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और चालक समेत कई लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी और घायलों को तत्काल सिंह मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर मौके से फरार हो गए थे।
इस मामले में धनंजय सिंह ने अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने कुछ आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी।
करीब दो दशक से अधिक समय से लंबित यह मामला वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट के सबसे पुराने मामलों में शामिल है। दोनों पक्षों की गवाही वर्ष 2021 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के चलते अंतिम फैसला नहीं हो पाया और सुनवाई लंबी खिंच गई।
फिलहाल अदालत ने स्पष्ट किया है कि इतने पुराने मामले में अब गवाहों की जिरह को और टाला नहीं जाएगा और सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसे में आने वाली तारीखें इस मामले के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं और लंबे समय से चल रहे इस केस में अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।




