यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बयानों और इस्तीफों के बाद अब विरोध का सिलसिला पोस्टरबाजी तक पहुंच गया है। यूपी के हापुड़ जिले में सवर्ण समाज के लोगों ने BJP के खिलाफ अनोखा विरोध दर्ज कराया है। यहां कई घरों के बाहर पोस्टर चिपकाए गए हैं, जिनमें साफ-साफ लिखा है: “ये सवर्ण समाज का घर है, BJP नेता न आएं…” और “UGC काला कानून वापस लो, वोट मांगने न आएं।” यह पोस्टरबाजी UGC के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी’ नियमों के खिलाफ सवर्ण समुदाय की बढ़ती नाराजगी को दर्शाती है, जो अब राजनीतिक रूप ले रही है।
विवाद की जड़ क्या है?
UGC के नए नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विशेष कमिटी, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रावधान है। इसका उद्देश्य SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक और दिव्यांग छात्रों को सुरक्षित माहौल देना है, लेकिन सवर्ण वर्ग (खासकर ब्राह्मण और सामान्य श्रेणी) का मानना है कि ये नियम उनके खिलाफ भेदभाव बढ़ाएंगे और शिक्षा में सामाजिक विभाजन पैदा करेंगे। यूपी में इस विरोध की शुरुआत प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों से जुड़ी कथित घटना से हुई, जहां अपमान के आरोप लगे। इसके बाद बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर इसे ‘काला कानून’ बताया, और अब अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने योगी सरकार के समर्थन में इस्तीफा दिया। लेकिन हापुड़ में यह विरोध अब आम लोगों तक पहुंच गया है।
हापुड़ में क्या हो रहा है?
हापुड़ के विभिन्न इलाकों में सवर्ण समाज के घरों के बाहर ये पोस्टर नजर आ रहे हैं। पोस्टरों में BJP नेताओं को वोट मांगने से मना किया गया है, और UGC नियमों को ‘सवर्ण विरोधी’ बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के हितों पर हमला हैं और इससे जातीय असंतोष बढ़ेगा। एक स्थानीय निवासी ने अनादि टीवी यूपी से बातचीत में कहा, “हमारे बच्चे भी मेहनत करते हैं, लेकिन ये नियम उन्हें पीछे धकेल देंगे। BJP ने हमें धोखा दिया है, इसलिए अब वोट नहीं देंगे।
सवर्ण समाज में क्यों बढ़ रहा गुस्सा?
यूपी में सवर्ण समाज (ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य आदि) BJP का पारंपरिक वोट बैंक रहा है, लेकिन UGC नियमों से असंतोष फैल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियम सामान्य श्रेणी के छात्रों में ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ का डर पैदा कर रहे हैं। हापुड़ के अलावा मेरठ, बरेली और अन्य जिलों में भी इसी तरह की पोस्टरबाजी की खबरें आ रही हैं। विपक्षी दल जैसे सपा और कांग्रेस इसे BJP के खिलाफ भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि BJP ने कहा है कि नियम समानता बढ़ाएंगे और गलतफहमियां दूर की जाएंगी।
राजनीतिक असर क्या होगा?
यह पोस्टरबाजी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले BJP के लिए चेतावनी साबित हो सकती है। सवर्ण समाज के गुस्से से पार्टी को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर पश्चिमी यूपी में जहां हापुड़ जैसे जिले निर्णायक हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी UGC नियमों का विरोध किया है और सवर्णों से एकजुट होने की अपील की है। अगर यह विरोध फैलता है तो BJP को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।




