वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोपों के बीच आश्रम में लगी एक लिफ्ट को लेकर सवाल खड़े किए गए। लेखिका भूमिका द्विवेदी ने दावा किया था कि आश्रम में लगाई गई लिफ्ट ऐशो-आराम का प्रतीक है।
हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां
पूजा कक्ष के पास है लिफ्ट
आश्रम में प्रवेश करते ही चंद्रमोलेश्वर भगवान और मां भगवती का भव्य मंदिर दिखाई देता है, जहां नियमित पूजा-अर्चना होती है। इसी पूजा कक्ष के ठीक बगल में वह लिफ्ट स्थित है, जिसका जिक्र विवादों में किया गया। यह लिफ्ट सीधे ऊपरी मंजिलों तक जाती है।
क्यों लगवाई गई थी यह लिफ्ट?
आश्रम प्रशासन के अनुसार, यह लिफ्ट मौजूदा शंकराचार्य के लिए नहीं बल्कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के लिए लगवाई गई थी।
बताया गया कि अपने अंतिम समय में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का स्वास्थ्य काफी कमजोर हो गया था। उनका शरीर स्थूल हो गया था और वे चलने-फिरने में असमर्थ थे। उन्हें व्हीलचेयर के सहारे ऊपरी मंजिलों तक ले जाने में कठिनाई होती थी। इसी शारीरिक विवशता को देखते हुए लिफ्ट का निर्माण कराया गया था।
अब वर्षों से बंद पड़ी है लिफ्ट
आश्रम के सेवादारों का कहना है कि स्वामी स्वरूपानंद जी के ब्रह्मलीन होने के बाद से यह लिफ्ट पूरी तरह बंद पड़ी है। इसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई है और वर्तमान में इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
आश्रम प्रशासन का दावा है कि जिस लिफ्ट को ‘ऐशो-आराम’ का साधन बताया जा रहा था, वह दरअसल एक बुजुर्ग संत की सुविधा और स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लगाया गया इंतजाम था।
आरोपों पर आश्रम का जवाब
आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि शंकराचार्य के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति के मेडिकल परीक्षण की भी मांग की है। आश्रम प्रशासन का कहना है कि यहां सब कुछ पारदर्शी है और पुलिस या प्रशासन जब चाहे जांच कर सकता है।
आरोपों पर आश्रम का जवाब
आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि शंकराचार्य के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति के मेडिकल परीक्षण की भी मांग की है। आश्रम प्रशासन का कहना है कि यहां सब कुछ पारदर्शी है और पुलिस या प्रशासन जब चाहे जांच कर सकता है।




