विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर किफायती थेरेपी, मोबाइल वैन और हेल्पलाइन का ऐलान
लखनऊ: विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस (02 अप्रैल) की पूर्व संध्या पर द होप फाउंडेशन द्वारा संचालित द होप रिहैबिलिटेशन एंड लर्निंग सेंटर ने न्यूरोडायवर्स बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। जानकीपुरम शाखा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था ने किफायती इलाज, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच और जागरूकता बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया।
संस्था वर्तमान में इंदिरा नगर, जानकीपुरम और गोमती नगर में सेवाएं दे रही है, साथ ही द होप ग्लोबल प्ले स्कूल का भी संचालन कर रही है।
बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस
संस्था के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों को इस काबिल बनाना है कि वे भी सामान्य बच्चों की तरह आगे बढ़ सकें और देश का नाम रोशन करें। उन्होंने बताया कि अब तक 100 से अधिक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा और गतिविधियों से जोड़ा जा चुका है।
वहीं, निदेशक एवं पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रीति कुरील ने अर्ली इंटरवेंशन (समय पर पहचान और इलाज) को बच्चों के जीवन में बदलाव का सबसे अहम कारक बताया।
ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. वेद प्रकाश और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जॉन विलियम ने कहा कि ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों की अलग सोच उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी पहचान है। सही थेरेपी और मार्गदर्शन से ये बच्चे आत्मनिर्भर बनकर सामान्य स्कूलों में पढ़ाई कर सकते हैं।
मुख्य घोषणाएं और नई पहल
- जरूरतमंद परिवारों को 50–70% तक रियायती दरों पर थेरेपी
- “होप ऑन व्हील्स” मोबाइल थेरेपी वैन के जरिए कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क आकलन शिविर
- मई 2026 से टोल-फ्री ‘होप हेल्पलाइन’ की शुरुआत
- 2026 के अंत तक 5 नई शाखाएं खोलने की योजना
जागरूकता और पहुंच बढ़ाने पर जोर
संस्था का कहना है कि ऑटिज़्म को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते पहचान और इलाज संभव हो सके। द होप फाउंडेशन का लक्ष्य आने वाले समय में अधिक से अधिक बच्चों और परिवारों तक अपनी सेवाएं पहुंचाना है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सुविधाएं सीमित हैं।




