यूजीसी के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन नियमों की भाषा और मंशा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ये नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जबकि अगली सुनवाई मार्च महीने में होगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 2012 के दिशानिर्देश फिलहाल लागू रहेंगे और आगे भी प्रभावी माने जाएंगे। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी सवाल उठाया कि 75 वर्षों में देश ने जाति-विहीन समाज की दिशा में जो प्रगति की है, क्या ऐसे नियम उस प्रक्रिया को पीछे ले जाने वाले साबित हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारत की एकता और सामाजिक समरसता की झलक शैक्षणिक संस्थानों में दिखाई देनी चाहिए और प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद घोसी से समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिस दिन ये नियम लाए गए थे, उस समय वे संयुक्त राष्ट्र में थे और अब उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली है। राजीव राय ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीति जनता का ध्यान भटकाने वाली है और वह नहीं चाहती कि जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो।
राजीव राय ने आगे कहा कि अगर सरकार की नीयत और नीति सही होती, तो सुप्रीम कोर्ट को इन नियमों पर हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके मुताबिक, अदालत ने गाइडलाइंस में कुछ खामियां जरूर पाई हैं, तभी यूजीसी नियमों पर रोक लगाई गई है।
इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा हुआ है और सरकार खुद असमंजस की स्थिति में नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पीडीए के साथ मजबूती से खड़ी है और पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि दोषी बचें नहीं और निर्दोष फंसें नहीं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सच्चा न्याय वही होता है जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो और कानून की भाषा व भावना दोनों स्पष्ट होनी चाहिए।




