यूजीसी नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इन नियमों की भाषा और मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ये नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जबकि अगली सुनवाई मार्च में तय की गई है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रयुक्त भाषा स्पष्ट नहीं है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि 75 वर्षों में जाति-विहीन समाज की दिशा में जो प्रगति हुई है, क्या ऐसे नियम उस यात्रा को पीछे की ओर ले जा सकते हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि देश की एकता और सामाजिक समरसता की झलक शैक्षणिक संस्थानों में दिखनी चाहिए, साथ ही प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सच्चा न्याय वही होता है जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो और माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि कानून की भाषा और भाव दोनों स्पष्ट होने चाहिए। उनका कहना था कि बात केवल नियमों की नहीं, बल्कि नीयत की भी होती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो और न ही किसी के साथ नाइंसाफी।




