समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम को लेकर जो बयान दिया था, उस पर वह आज भी कायम हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम वास्तव में गरीब, वंचित और समाज के कमजोर तबके के हितैषी थे, जबकि भाजपा केवल राजा राम की उपासक है।
सपा सांसद ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि अयोध्या के राजा राम ने वनवास के दौरान आम जनता और वनवासियों का साथ दिया था। वहीं, भाजपा केवल राजसी दृष्टिकोण से राम का समर्थन करती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार भगवान राम समाजवादी थे, क्योंकि उन्होंने राजा दशरथ और अन्य राजाओं का नहीं, बल्कि आम लोगों और वनवासियों का पक्ष लिया।
बीजेपी का पलटवार
सपा सांसद के बयान के बाद बीजेपी के नेताओं ने पलटवार किया। बीजेपी के नेता अजय आलोक ने कहा, “राजा राम ने अपने पिता के आदेश पर अयोध्या छोड़ दी थी, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तो अपने पिता को ही पार्टी से अलग कर दिया।” उन्होंने सपा सांसद के बयान को राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करार दिया।
सपा सांसद का जवाब
वीरेंद्र सिंह ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि अयोध्या के राजा राम तो राम ही बने थे और उनके आदर्श गरीब और वंचित तबके के हित में थे। उन्होंने कहा, “बीजेपी केवल राजा राम के उपासक हैं, जबकि हम लोग समाज के कमजोर और पीड़ित वर्ग यानी PDA के समर्थक हैं। भगवान राम ने वनवास के समय इन्हीं लोगों के साथ मिलकर रावण पर विजय प्राप्त की थी।”
सियासी विवाद
वीरेंद्र सिंह के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ के आदेश का पालन करते हुए वनवास लिया, लेकिन उन्होंने राजाओं का समर्थन नहीं किया। इसके विपरीत, बीजेपी केवल राजा राम को मानने वाले हैं और राजनीतिक फायदे के लिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रही है।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज तक अयोध्या में रामलला के दर्शन नहीं करने गए, फिर भी अब उन्हें समाजवादी बताने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं।




