उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर दिन-रात कुछ न कुछ नया देखने सुनने को मिल रहा है.। अपने-अपने बयानों को लेकर पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर हैं।
राणा सांगा को लेकर सपा के सांसद लालजी सुमन ने सदन में बयान दिया जिसको लेकर काफ़ी विवाद भी हुआ उनके इस बयान पर भाजपा के कई नेता सपा पर हमालवार दिखे।
उसके बाद करणी सेना के लोगों ने आगरा मे उनके घर का घेराव किया। पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। पूरी समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को दलित राजनीति की तरफ मोड़ने मे लगी थी। अखिलेश यादव ने कहा था कि दलित होने कि वजह से राज्यसभा सांसद के घर हमला हुआ था।
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इसके बाद मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सपा पर भी निशाना साधा था। जिसमे कहा आगरा की घटना के साथ साथ सपा को गेस्टहाउस कांड भी याद करना चाहिए और उसके लिए उन्हे पश्चाताप भी करना चाहिए। अखिलेश यादव अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज मे थे। उन्होंने गौशालाओं को लेकर बयान दिया उसके बाद सुगंध और दुर्गन्ध के मुद्दे पर राजनीति होने लगी। पूरी भारतीय जनता पार्टी उनपर गौशाला वाले बयान को लेकर हमलावर थी।
बीते दिनों भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश मे अपने 8 वर्षों के कार्यकाल को लेकर जगह जगह कार्यक्रम कर रही थी और अपनी उपलब्धियां गिनाने में लगी हुई थी।
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार के 8 वर्षों के कार्यकाल को लेकर कहा कि सरकार के सारे वादे झूठे है सरकार बताएं कि वह युवाओं को नौकरी क्यों नहीं दे रही खाद मांगने वाले किसानों को लाठी मिल रही है इसके बाद भी सरकार अपनी उपलब्धि गिनाने मे व्यस्त है उन्होंने सीएम योगी के इस्तीफे की पेशकश की जिस प्रकार से सभी दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं कहीं ना कहीं सभी के जेहन में 27 का विधानसभा चुनाव है