पंचायत चुनाव 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही तमाम अटकलों पर अब विराम लग गया है। चुनाव टलने की चर्चाओं के बीच राज्य सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे और इन्हें आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।
हाथरस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार पंचायत चुनाव की तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं। चुनाव के लिए आवश्यक मतपत्र सभी जिलों तक पहुंचा दिए गए हैं और प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम भी तेज़ी से चल रहा है। मार्च 2026 में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की असमंजस की स्थिति न बने और मतदान सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव अप्रैल और मई 2026 के दौरान कराए जाएंगे। यानी गर्मी के इन महीनों में प्रदेश के गांवों में लोकतंत्र का यह महत्वपूर्ण उत्सव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड में है और सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी।
गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों से पंचायत चुनाव टलने को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर), नई यूजीसी नियमावली और संभावित जनगणना को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि इन वजहों से चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। इन अटकलों को खारिज करते हुए मंत्री ने साफ कहा कि इन मुद्दों का पंचायत चुनाव से कोई सीधा संबंध नहीं है।
जनगणना को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि अगली जनगणना वर्ष 2027 में प्रस्तावित है, इसलिए इसका मौजूदा पंचायत चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दोहराया कि पंचायत चुनाव पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत तय समय पर कराए जाएंगे।
वहीं यूजीसी के नए नियमों पर चल रही बहस को लेकर मंत्री ने कहा कि यह कोई असामान्य विषय नहीं है। उनका कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य संविधान के दायरे में रहकर समानता सुनिश्चित करना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह सभी को स्वीकार्य होगा।
कुल मिलाकर तस्वीर अब पूरी तरह साफ है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव न तो टलेंगे और न ही अपने तय कार्यक्रम से बाहर जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां लगातार जारी हैं और अप्रैल–मई 2026 में प्रदेश के गांवों में लोकतंत्र का यह अहम पर्व पारदर्शिता और उत्साह के साथ संपन्न कराया जाएगा।




