‘आओ सजाएँ कान्हा का ब्रज’: प्रेमानंद महाराज ने किया पुस्तक लोकार्पण, ब्रज की खोई विरासत को फिर से सजाने की प्रेरक कहानी

ब्रज क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, विरासत और आध्यात्मिक धरोहर को बचाने व संवारने के दो दशकों से अधिक के अथक प्रयास अब एक पुस्तक का रूप ले चुके हैं। वरिष्ठ पत्रकार और द ब्रज फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष विनीत नारायण की पुस्तक ‘आओ सजाएँ कान्हा का ब्रज’ का लोकार्पण विश्वप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने वृंदावन स्थित अपने आश्रम में किया।

सादगी भरे लेकिन भावपूर्ण समारोह में संत प्रेमानंद जी महाराज ने पुस्तक को “आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह किताब सिर्फ ब्रज के प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण नहीं करती, बल्कि सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक पुनर्जीवन की भावना को भी अमर बनाती है।

23 वर्षों का अनुभव और बिना सरकारी सहायता के जीर्णोद्धार

विनीत नारायण द्वारा रचित यह पुस्तक द ब्रज फाउंडेशन के 23 सालों के ब्रज संरक्षण कार्यों का जीवंत दस्तावेज है। वर्ष 2002 से फाउंडेशन ब्रज के उपेक्षित कुंडों, वनों, पर्वतों, यमुना घाटों और कृष्ण लीला स्थलों के पुनरुद्धार में जुटा हुआ है। खास बात यह है कि ये सभी कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिना किसी केंद्र या राज्य सरकार की आर्थिक मदद के पूरे किए गए।

आज ब्रहमकुंड, रामताल, सेवाकुंज, गोवर्धन के ऋणमोचन कुंड, रुद्र कुंड, संकर्षण कुंड, बरसाना का जल महल, गहवर वन, जैत गांव का कालिया दमन स्थल, अजयवन, ब्रहमवन, कोईले घाट और कामां के केदारनाथ व गौरी शंकर मंदिर जैसे दर्जनों स्थल श्रद्धालुओं व पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण बन चुके हैं।

फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार को ब्रज विकास के लिए परामर्श भी दिया है। ब्रज का पहला व्यापक पर्यटन मास्टर प्लान इसी संस्था ने तैयार किया और कई लीला स्थलों के संरक्षण के लिए विस्तृत प्रस्ताव दिए, हालांकि हाल के वर्षों में इनकी गति कुछ धीमी पड़ी है।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ ने की सराहना

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने द ब्रज फाउंडेशन के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा, “आजादी के बाद कई राज्य सरकारें पर्यटन विकास में जो नहीं कर सकीं, वह द ब्रज फाउंडेशन ने बिना सरकारी सहायता के कुछ वर्षों में कर दिखाया।”

यह पुस्तक ब्रज प्रेमियों, श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक संरक्षण में रुचि रखने वालों के लिए अवश्य पढ़ने योग्य है।

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