केशव मौर्य ने शंकराचार्य को बताया ‘भगवान’, गौ हत्या और मार्च के ऐलान के बीच बढ़ी सियासी हलचल

up news

पूर्वांचल की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बनारस दौरे के दौरान ज्योति पीठ के शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर बड़ा बयान दिया। वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान हैं। वे कहीं भी आएंगे-जाएंगे तो भक्त उनका स्वागत करेंगे। हम भी राम, शिव और कृष्ण भक्त हैं, सनातन संस्कृति के पोषक हैं, इसलिए उनका अभिनंदन करते हैं।”


यह बयान ऐसे समय आया है जब शंकराचार्य और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तनातनी खुलकर सामने आ चुकी है। शंकराचार्य ने बनारस से लखनऊ तक गौ हत्या के मुद्दे पर मार्च निकालने का ऐलान किया है, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।


गौ हत्या पर सख्त रुख


डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी गौ हत्यारे की हिम्मत नहीं है कि वह गौ माता को खरोंच भी पहुंचा सके। उन्होंने साफ किया कि अगर कोई ऐसी कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जब उनसे पूछा गया कि गौ माता को आधिकारिक दर्जा कब दिया जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया कि “माता तो वह पहले से ही हैं, जैसे बाबा विश्वनाथ को किसी दर्जे की जरूरत नहीं।”


मुख्यमंत्री का बयान भी चर्चा में


इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा में टिप्पणी की थी कि हर कोई अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिख ले, इससे वह शंकराचार्य नहीं हो जाता और मर्यादाओं का पालन जरूरी है। इस बयान को भी मौजूदा विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है।


माघ मेले से शुरू हुआ विवाद


पूरा विवाद माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन सामने आया था। स्नान के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रशासन का कहना था कि भारी भीड़ को देखते हुए रथ से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जबकि शंकराचार्य ने अभद्र व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए।


बाद में वे अनशन पर बैठे और गौ हत्या के मुद्दे पर आंदोलन की घोषणा की। इसी दौरान उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण का मामला दर्ज हुआ। शंकराचार्य ने इसे साजिश करार दिया है और फिलहाल उन्हें अदालत से राहत मिली हुई है।
अब एक ओर प्रशासन उनकी मान्यता और भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं डिप्टी सीएम उन्हें ‘भगवान’ बताकर सम्मान जता रहे हैं। ऐसे में यह मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा क्या होगी, इस पर सबकी नजर टिकी है।

[acf_sponsor]