7 साल बाद मिला इंसाफ: नीट एग्जाम छूटने से छात्रा की मेहनत बर्बाद, रेलवे पर 9.10 लाख का जुर्माना ठोका

भारतीय रेलवे को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से बड़ा झटका लगा है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक 7 साल पुराने मामले में रेलवे पर 9 लाख 10 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। मामला 2018 का है, जब बस्ती की रहने वाली छात्रा समृद्धि ट्रेन की लेटलतीफी के कारण अपनी नीट परीक्षा देने से चूक गई थी। आज 27 जनवरी 2026 को आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने फैसला सुनाया, जिसमें रेलवे की सेवा में कमी को सिद्ध माना गया।

क्या था पूरा मामला?

समृद्धि (बस्ती कोतवाली थाना क्षेत्र के पिकौरा बक्स मोहल्ले की निवासी) ने 2018 में नीट (NEET) परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था। उनका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज में अलॉट हुआ था। बस से जाने में समय लगता, इसलिए समय बचाने के लिए उन्होंने बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट बुक किया। ट्रेन का निर्धारित समय लखनऊ पहुंचने का सुबह 11 बजे था, ताकि वह 11 बजे तक सेंटर पहुंचकर 12 बजे की परीक्षा दे सकें। रिपोर्टिंग टाइम 12:30 बजे तक था।

लेकिन ट्रेन ढाई घंटे से ज्यादा लेट हो गई और लखनऊ चारबाग स्टेशन पर दोपहर 1:34 बजे पहुंची। इससे समृद्धि परीक्षा केंद्र पर बहुत लेट पहुंची और एग्जाम में बैठ नहीं पाई। सालों की मेहनत और तैयारी पर पानी फिर गया, उनका पूरा एकेडमिक ईयर बर्बाद हो गया। आहत होकर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में रेलवे के खिलाफ याचिका दायर की।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। रेलवे ने ट्रेन लेट होने की बात तो मानी, लेकिन लेट होने का स्पष्ट कारण नहीं बताया। कोर्ट ने इसे सेवा में कमी (deficiency in service) माना और रेलवे (केंद्रीय रेल मंत्रालय, महाप्रबंधक और स्टेशन अधीक्षक) को दोषी ठहराया। रेलवे को 45 दिनों के अंदर समृद्धि को 9 लाख 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। अगर देरी हुई तो पूरी राशि पर 12% सालाना ब्याज भी देना होगा।

समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि रेलवे को नोटिस भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। 11 सितंबर 2018 को मुकदमा दायर हुआ और लंबी सुनवाई के बाद आज फैसला आया। समृद्धि के पिता एडवोकेट रवि प्रताप सिंह ने कहा कि ट्रेन लेट होने से अगर किसी का बड़ा नुकसान होता है तो कोर्ट का रुख करना चाहिए – यह फैसला अन्य छात्रों के लिए भी मिसाल बनेगा।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

देश में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ट्रेनों पर निर्भर हैं। रेलवे की समयबद्धता न होने से करियर प्रभावित हो सकता है। यह फैसला रेलवे को समय पर सेवा देने की याद दिलाता है और उपभोक्ता अधिकारों की जीत है।

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