अतिक्रमण हटाकर ‘बहराइच रिवर फ्रंट’ विकसित करने की उठी मांग, पर्यावरण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
बहराइच, उत्तर प्रदेश। जिले की महत्वपूर्ण जलधारा झिंगहा नदी (सरयू की शाखा) को अतिक्रमण मुक्त कर उसके सुनियोजित विकास की मांग अब तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता संजीव सिंह राठौर ने नदी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे बहराइच की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर बताया।
उन्होंने कहा कि झिंगहा नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और जीवनरेखा है। लेकिन वर्तमान में नदी के किनारों पर तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण इसका प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे जल प्रदूषण और बाढ़ जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
संजीव सिंह राठौर के अनुसार, नदी के आसपास अवैध कब्जों ने इसकी चौड़ाई और प्रवाह दोनों को प्रभावित किया है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि झिंगहा नदी को अतिक्रमण मुक्त कर उसके किनारों पर ‘बहराइच रिवर फ्रंट’ विकसित किया जाए। उनका मानना है कि इस परियोजना से शहर को एक नई पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
राठौर ने कहा कि यदि नदी का विकास सुनियोजित तरीके से किया जाता है, तो यह क्षेत्र पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा,
“बहराइच की संस्कृति तभी सुरक्षित रह सकती है, जब हमारी नदियाँ जीवित रहें।”
अंत में उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए और जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि झिंगहा नदी का अस्तित्व और उसकी गरिमा बनी रह सके।




