बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब और गहरा हो गया है। खबर सामने आई है कि अलंकार ने ही नहीं, उनकी मां ने भी वर्षों पहले आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी थी। यह जानकारी अलंकार के ताऊ, सेवानिवृत्त विंग कमांडर एस.के. अग्निहोत्री ने दी है।
अलंकार का परिवार और पृष्ठभूमि
अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के केशवनगर के निवासी हैं। यूपी पीसीएस 2019 में उन्होंने प्रदेश में 15वीं रैंक हासिल की थी। वे परिवार में सबसे बड़े हैं। उनके तीन भाई और एक बहन हैं, जो अलग-अलग जगहों पर नौकरी करते हैं।
अलंकार के चचेरे भाई राजेश कुमार ने बताया कि पिता विजय कुमार के निधन के बाद उनकी मां ने अकेले ही सभी बच्चों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया। मां बैंक ऑफ बड़ौदा में कैशियर के पद पर 21 साल तक नौकरी करती रहीं।
मां ने भी छोड़ी थी नौकरी
ताऊ एस.के. अग्निहोत्री ने बताया कि परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उत्तरीपुरवा के ऊधो निवादा गांव का है। नौकरी के कारण शहर में बस गए, लेकिन आत्मसम्मान के लिए परिवार ने कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने बताया कि छोटे भाई विजय के निधन के बाद उनकी बहू (अलंकार की मां) ने बैंक में लंबे समय तक सेवा की, लेकिन एक छोटी-सी घटना ने उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई। इसके बाद उन्होंने सम्मान की रक्षा के लिए नौकरी छोड़ दी। ताऊ का कहना है कि शायद यही आत्मसम्मान की भावना अलंकार में भी है, जिसके कारण उन्होंने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इतना बड़ा कदम उठाया।
अलंकार के इस्तीफे की वजह
अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 को सवर्ण समाज के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया। साथ ही प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई मारपीट और अपमान से वे बेहद आहत थे। उनका मानना है कि मौजूदा सरकार और प्रशासन साधु-संतों और ब्राह्मण समाज के खिलाफ काम कर रहा है।
उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि देश में न जनतंत्र है, न गणतंत्र – बस “भ्रमतंत्र” चल रहा है।
परिवार का समर्थन
अलंकार के चचेरे भाई राजेश कुमार ने कहा: “भाई ने जो फैसला लिया है, वह बहुत सोच-समझकर लिया है। वह सवर्णों के साथ हो रहे भेदभाव और प्रयागराज की घटना से बहुत आहत थे। यह फैसला उन्होंने युवाओं के लिए लिया है।”ताऊ एस.के. अग्निहोत्री ने कहा: “अलंकार ने जो किया, ठीक किया। वह पढ़ा-लिखा, समझदार लड़का है। मैं उसकी जगह होता तो शायद यही करता।”
क्या हुआ इसके बाद?
- गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा देने के बाद अलंकार ने खुलकर विरोध जताया।
- डीएम आवास में बंधक बनाए जाने, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
- सोमवार रात को शासन ने उन्हें निलंबित कर शामली जिले से संबद्ध कर दिया।
- मंगलवार को समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पर धरना, नारेबाजी की।
- बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें बरेली से बाहर भेज दिया गया। समर्थकों ने गाड़ी रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस कामयाब रही।
यह घटना UGC के नए नियमों के विरोध में हो रहे व्यापक आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जिसमें इस्तीफे, प्रदर्शन और सवर्ण संगठनों की नाराजगी तेजी से बढ़ रही है।





