राज्यपाल ने अयोध्या में भगवान राम को बताया समरसता का प्रतीक, महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में प्रतिमा अनावरण!

अयोध्या में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महर्षि महेश योगी की 109वीं जयंती के अवसर पर महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में भगवान राम की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भगवान राम केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और नैतिकता के प्रतीक हैं।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में बताया कि आधुनिक युग में भगवान राम से हमें गहन प्रेरणा मिलती है। उनके जीवन और उनके आदर्शों से यह सीख मिलती है कि सत्ता का प्रयोग सेवा के माध्यम से होना चाहिए, शक्ति का उद्देश्य केवल सेवा के लिए होना चाहिए और निर्णयों का आधार लोककल्याण और न्याय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन लाने की आधारशिला है, और यही युवाओं को मार्गदर्शन देती है।

कुलाधिपति का संदेश: आध्यात्मिक ज्ञान का विकास युवा का लक्ष्य
महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि महर्षि योगी ने अयोध्या के लिए मास्टर प्लान तैयार किया था। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा का विकास करना होना चाहिए, ताकि युवा इस ज्ञान के बल पर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित हों।

कुलाधिपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में युवाओं की चेतना को विकसित करने के लिए सरल और प्रभावी तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से भी इस मिशन में सहयोग करने की अपील की।

महापौर का बयान: अयोध्या संभावनाओं का महानगर
अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति तिवारी ने कहा कि आज विश्वविद्यालय की भूमि पर भगवान राम की प्रतिमा स्थापित होने से छात्रों को श्रीराम के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या संभावनाओं का महानगर है और यहां के युवा देश और समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं।

अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ ने भी कहा कि श्रीराम की प्रतिमा ज्ञान की चेतना का मूर्त रूप है। उन्होंने यह बताया कि विकास के साथ विवेक का होना भी आवश्यक है।

भगवान राम की प्रतिमा और विश्वविद्यालय का निर्माण
महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय का निर्माण 500 करोड़ रुपए की लागत से कराया जा रहा है। परिसर में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा कोलकाता और लखनऊ के कारीगरों ने मिलकर तैयार की है, और इसे बनाने में लगभग एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है।

प्रतिमा का अनावरण ऐसे समय में हुआ जब विश्वविद्यालय में आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि युवा केवल तकनीकी या शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक मूल्यों से भी संपन्न हों।

इस समारोह ने यह संदेश दिया कि अयोध्या केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि शिक्षा, आध्यात्म और सामाजिक समरसता का केंद्र भी बनता जा रहा है। भगवान राम की प्रतिमा और विश्वविद्यालय के माध्यम से युवा पीढ़ी को नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना विकसित करने का मार्ग मिलेगा।

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