मुजफ्फरनगर में मारपीट के बाद बढ़ा विवाद, किसान मजदूर संगठन अध्यक्ष ठाकुर पूर्ण सिंह के परिवार पर केस

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मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में मारपीट का एक मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूर्ण सिंह के परिवार पर केस दर्ज होने के बाद यह विवाद और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

यह मामला तितावी थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव का बताया जा रहा है, जहां ठाकुर पूर्ण सिंह और कश्यप समाज के एक युवक के बीच हुई मारपीट के बाद पुलिस कार्रवाई हुई है। नसीरपुर गांव निवासी दुश्यंत की तहरीर पर तितावी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठाकुर पूर्ण सिंह के बेटे नंदू उर्फ विजय प्रताप, उनके भाई रवि और चालक अभिषेक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस ने इस मामले में कई अज्ञात लोगों के साथ-साथ ठाकुर पूर्ण सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

घटना के बाद ठाकुर पूर्ण सिंह ने अपने गांव नसीरपुर में प्रेस वार्ता कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह केवल मामूली कहासुनी का मामला था, जिसे पुलिस ने बेवजह बड़ा बना दिया।

उनके अनुसार होली के अगले दिन गांव लौटते समय रास्ते में गाड़ी साइड करने को लेकर दुश्यंत से कहासुनी हो गई थी। इसके बाद दुश्यंत पक्ष के कुछ लोग उनके घर पहुंच गए और उनके बेटे व भाई पर हमला कर दिया। उनका कहना है कि उनके बेटे ने आत्मरक्षा में मारपीट की।

पूर्ण सिंह ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि मुकदमा दर्ज करना था तो दोनों पक्षों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।

पश्चिमी यूपी की राजनीति में सक्रिय नाम

ठाकुर पूर्ण सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक समीकरणों में एक जाना-पहचाना नाम माने जाते हैं। किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर वह लंबे समय से कई जिलों में सक्रिय रहे हैं और समय-समय पर सामाजिक पंचायतों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं।

साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम चर्चा में आया था, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ठाकुर समाज की पंचायतें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कैराना और मेरठ जैसे इलाकों में समाज को एकजुट करने की कोशिश की गई थी।

14 मार्च को पंचायत का ऐलान

फिलहाल पुलिस मामले की जांच जारी होने की बात कह रही है। वहीं दूसरी ओर ठाकुर पूर्ण सिंह और उनके समर्थकों ने 14 मार्च को नसीरपुर गांव में पंचायत बुलाने का ऐलान किया है।

ऐसे में अब सबकी नजर इस पंचायत और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातीय और राजनीतिक समीकरण पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं।

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