Shankaracharya vs Rambhadracharya: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला बेहद गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जो प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट तक पहुंच चुका है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य पर शिविर और गुरुकुल की आड़ में नाबालिगों के यौन शोषण, बाल उत्पीड़न और अन्य अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगाए हैं। शिकायत 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दाखिल की गई।
कोर्ट में क्या हुआ?
शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया कि दो नाबालिग पीड़ितों को कोर्ट में पेश किया गया।
10 फरवरी को शंकराचार्य की ओर से उनके वकील ने कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है।
अब 20 फरवरी को दोनों पक्षों के वकील अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे। इसके बाद अदालत तय करेगी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए या शिकायत को निरस्त कर दिया जाए।
शंकराचार्य का पलटवार- ‘घटिया कार्टेल सक्रिय’
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनके विरोधी अब “नीचता की हद” पर उतर आए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने जो सवाल उठाए थे वे शास्त्र आधारित थे। जब वे हमें वैचारिक स्तर पर नहीं घेर सके, तो अब इस तरह के घृणित आरोप लगाए जा रहे हैं।”
शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ एक “कार्टेल” सक्रिय है, जिसमें कुछ राजनीतिक तत्वों की भूमिका भी हो सकती है। उनका कहना है कि गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर उनकी मुखर भूमिका के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
पुरानी अदावत से जुड़ा है विवाद?
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में जगद्गुरु रामभद्राचार्य और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहा पुराना मतभेद भी माना जा रहा है।
हाल ही में रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को “फर्जी शंकराचार्य” बताया था। वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उन्होंने केवल शास्त्रीय मर्यादाओं के तहत प्रश्न उठाए थे, लेकिन इसे व्यक्तिगत विवाद का रूप दे दिया गया।
माघ मेले से बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई थी। उस समय शंकराचार्य को स्नान से रोकने और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज के बाद मामला गरमा गया था।
इसके बाद प्रशासन की ओर से उन्हें “शंकराचार्य” की उपाधि के उपयोग और मेला क्षेत्र खाली करने संबंधी नोटिस भी जारी किए गए थे।
आगे क्या?
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 20 फरवरी की सुनवाई में दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे एफआईआर दर्ज होगी या शिकायत खारिज की जाएगी।
शंकराचार्य ने कहा है कि “सांच को आंच नहीं” और वे इस कानूनी लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ेंगे।




