लखनऊ। प्रशासन की संवेदनशीलता और तेज कार्रवाई का एक शानदार उदाहरण सामने आया है। पारा क्षेत्र की दिव्यांग महिला खुशबू, जो दोनों पैरों से असमर्थ हैं, अब ई-स्कूटी की मदद से आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं। उनके 6 साल के बेटे का स्कूल में दाखिला भी हो गया। यह सब लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर की पहल से संभव हुआ।खुशबू के लिए घर से बाहर निकलना, रोजमर्रा के काम और बेटे को स्कूल छोड़ना-लाना बहुत चुनौतीपूर्ण था। 29 जनवरी 2026 को जनता दर्शन कार्यक्रम में उन्होंने DM विशाख जी को प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि बिना सहारे के आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। ई-स्कूटी या इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर मिल जाए तो वे बच्चे की देखभाल कर सकेंगी और आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
DM विशाख जी ने तुरंत संज्ञान लिया और जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी शशांक सिंह को निर्देश दिए। जांच के बाद पता चला कि विभाग में फिलहाल ई-स्कूटी जैसी कोई सरकारी योजना नहीं चल रही है। फिर भी DM ने हार नहीं मानी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के जरिए सहायता जुटाई।परिणामस्वरूप, 4 फरवरी 2026 को जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय में खुशबू को इलेक्ट्रिक 3-व्हील स्कूटी सौंपी गई। साथ ही उनके बेटे का स्कूल एडमिशन भी कराया गया।
खुशबू का भावुक बयान

स्कूटी मिलने के बाद खुशबू ने कहा, “अब मेरे जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। मैं बेटे के साथ बाहर जा पाऊंगी, रोज के काम आसानी से कर पाऊंगी। भविष्य में स्वरोजगार भी शुरू कर सकती हूं।” उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी विशाख जी, जिला प्रशासन और दिव्यांगजन विभाग का दिल से आभार जताया। उनका कहना है कि इस मदद से वे सम्मानजनक और स्वावलंबी जीवन जी सकेंगी।
DM की पहल की सराहना
यह घटना दिखाती है कि जनता दर्शन सिर्फ सुनवाई नहीं, बल्कि समस्याओं का असली समाधान है। DM विशाख जी की त्वरित कार्रवाई और CSR के माध्यम से मदद जुटाने से हजारों दिव्यांगों के लिए उम्मीद की किरण बनी। Anaadi TV UP ऐसे पॉजिटिव बदलावों को लगातार हाइलाइट करता रहेगा।




