लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 25 हजार अंशकालिक अनुदेशक शिक्षकों (इंस्ट्रक्टर टीचर्स) के लिए ऐतिहासिक जीत! सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार की अपील पूरी तरह खारिज कर दी। अब इन शिक्षकों की नौकरी खत्म नहीं होगी और उन्हें 17,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 10 साल से लगातार सेवा देने के कारण उनका पद ऑटोमैटिक रूप से स्थायी माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविदा अवधि खत्म होने के बाद भी इनकी सेवा समाप्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इसे ‘कांट्रैक्चुअल’ नहीं माना क्योंकि उनके अनुबंध में स्पष्ट है कि वे स्पेयर टाइम में कोई अन्य काम नहीं कर सकते। इतने लंबे समय तक सेवा और लगातार काम की वजह से पद डीम्ड परमानेंट हो गया है। कोर्ट ने 2013 से तय ₹7,000 मानदेय को “अनुचित श्रम व्यवहार” और संविधान के आर्टिकल-23 (बेगार निषेध) के खिलाफ करार दिया।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से सवाल किया: “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। मानदेय बढ़ाने में आपको क्या समस्या है?” राज्य सरकार के वकील को भी इस पर सहमति जतानी पड़ी। कोर्ट ने कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को सम्मानजनक पारिश्रमिक से वंचित नहीं किया जा सकता। मानदेय का नियमित पुनरीक्षण जरूरी है।
फैसले के मुख्य बिंदु
-अनुदेशकों को 17,000 रुपये मासिक मानदेय 2017 से लागू होगा।
-संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू।
-2017 से अब तक का पूरा बकाया (एरियर) 6 महीने के भीतर (4 फरवरी 2026 से गिनती) चुकाना अनिवार्य।
-नौकरी सुरक्षित, कोई टर्मिनेशन नहीं।
मामले का बैकग्राउंड
अनुदेशक 2013 से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। 2017 में बेसिक शिक्षा विभाग ने मानदेय 8,470 से बढ़ाकर 17,000 रुपये करने का फैसला लिया, लेकिन सत्ता बदलाव के बाद लागू नहीं हुआ। लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस राजेश सिंह चौहान) ने 17,000 रुपये + 9% ब्याज का आदेश दिया। सरकार ने अपील की, डबल बेंच ने सिर्फ एक साल के लिए मंजूर किया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 2 साल बाद फैसला आया।
अनुदेशकों के वकील का बयान
विधिक सलाहकार बृजेश कुमार त्रिपाठी (अमेठी निवासी) ने कहा: “यह अनुदेशकों की लंबी लड़ाई की बड़ी जीत है। कोर्ट ने उनके साथ न्याय किया। 2017 से बढ़ा मानदेय और बकाया मिलेगा। हजारों परिवारों को राहत मिली।”
सुप्रीम कोर्ट

“10 साल से लगातार काम करने वाले अनुदेशक परमानेंट डीम्ड हैं। ₹7,000 मानदेय बेगार जैसा है। पढ़ाई के लिए शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन जरूरी।”





