उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक खास मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यह मुलाकात है पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh और भाजपा के वरिष्ठ नेता Kalraj Mishra के बीच। दिल्ली में हुई इस भेंट का वीडियो खुद बृजभूषण शरण सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।
कहने को यह मुलाकात यूजीसी बिल पर रोक लगने के बाद एक-दूसरे को बधाई देने के लिए बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे इससे कहीं आगे की सियासी केमिस्ट्री के तौर पर देख रहे हैं। खासतौर पर ऐसे समय में जब भाजपा के कई पुराने और अनुभवी नेता फिर से सक्रिय नजर आ रहे हैं।
ब्राह्मण–ठाकुर समीकरण और पुराने चेहरों की सक्रियता
सियासी हलकों में चर्चा है कि यह मुलाकात यूपी में भाजपा के पारंपरिक ब्राह्मण–ठाकुर समीकरण को फिर से मजबूत करने की कोशिश का संकेत हो सकती है। कालराज मिश्र जहां ब्राह्मण समाज के बड़े चेहरे माने जाते हैं, वहीं बृजभूषण शरण सिंह की ठाकुर राजनीति में मजबूत पकड़ रही है।
दिलचस्प यह भी है कि सिर्फ बृजभूषण ही नहीं, बल्कि पार्टी के वे नेता भी दोबारा सक्रिय होते दिख रहे हैं, जो हाल के वर्षों में हाशिए पर नजर आ रहे थे। Uma Bharti ने 2029 में झांसी से चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है, जबकि Vinay Katiyar के भी अयोध्या से 2029 के रण में उतरने की तैयारी की चर्चाएं हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि भाजपा का वह पुराना कोर, जो कभी पार्टी की पहचान रहा है और जिसे रिटायरमेंट की ओर बढ़ता माना जा रहा था, अब फिर से संगठित हो रहा है।
यूजीसी बिल और सियासी एकजुटता
यूजीसी बिल पर अदालत की रोक और केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा। बृजभूषण शरण सिंह शुरू से ही इस बिल के खिलाफ मुखर रहे हैं। अब जब बिल पर रोक लग चुकी है, तो इसके विरोध में आवाज उठाने वाले नेता एकजुट होते दिख रहे हैं। कालराज मिश्र के कड़े रुख की सराहना करते हुए बृजभूषण ने कहा कि उनके बयान से “देश का बहुत भला हुआ, वरना पूरा ताना-बाना बिगड़ जाता।”
पुराने रिश्तों की याद
मुलाकात के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने कालराज मिश्र के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर उन्होंने 1989 के उस दौर को भी याद किया, जब कालराज मिश्र ने उन्हें राजनीति में पहला अवसर दिया था। हालांकि वह चुनाव हार गए थे, लेकिन 1991 और 1996 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का टिकट उन्हें कालराज मिश्र की ही पहल पर मिला था। इस बात को बृजभूषण ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।
कुल मिलाकर, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं मानी जा रही। यूपी की राजनीति में इसके दूरगामी संकेत देखे जा रहे हैं, जिन्हें आने वाले समय में भाजपा की रणनीति से जोड़कर देखा जा सकता है।





