उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर गरमाया हुआ है। आरक्षित वर्ग (ओबीसी, दलित और पिछड़े) के हजारों अभ्यर्थी लंबे इंतजार से तंग आ चुके हैं और न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। सोमवार (2 फरवरी 2026) को लखनऊ में इन अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आधिकारिक आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
अभ्यर्थियों का गुस्सा इस बात पर भड़का कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई बार-बार टल रही है और अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं आया। वे “केशव चाचा न्याय करो”, “योगी जी न्याय करो” जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही है, जिससे गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शन का पूरा माजरा क्या है?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भारी संख्या में केशव मौर्य के आवास की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया। भारी पुलिस बल तैनात था, जिसने अभ्यर्थियों को आवास के करीब नहीं पहुंचने दिया। नारेबाजी और धरना देने की कोशिश में कुछ देर तक हंगामा मचा रहा। पुलिस ने अभ्यर्थियों को जबरन बसों में भरकर ईको गार्डन भेज दिया, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
नेतृत्व कर रहे प्रमुख अभ्यर्थी अमरेंद्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने बताया कि यह भर्ती प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी। रिजल्ट आने पर आरक्षित वर्ग के साथ बड़े पैमाने पर अन्याय हुआ। उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया गया। लंबे संघर्ष और कोर्ट केस के बाद 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने नियमों के मुताबिक नियुक्ति देने का आदेश दिया था।
लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने इस फैसले को लागू करने में हीलाहवाली की। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, जहां सुनवाई बार-बार टल रही है। अभ्यर्थी कहते हैं कि सरकार के पास पर्याप्त समय था, लेकिन वो हाईकोर्ट के फैसले का पालन नहीं कर रही। पहले भी कई बार केशव मौर्य से मुलाकात हुई, उन्होंने त्वरित न्याय का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब अभ्यर्थी हताश हैं और कह रहे हैं कि “खाने के दांत अलग, दिखाने के दांत अलग” साबित हो रहा है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
- हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार तुरंत संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार कर नियुक्तियां दी जाएं।
- सुप्रीम कोर्ट में सरकार सही तरीके से पैरवी करे और मामले को जल्द निपटाया जाए।
- आरक्षण नियमों का सही पालन हो, ताकि पिछड़े, दलित और गरीब अभ्यर्थियों को उनका हक मिले।
प्रदर्शन में विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल, मो. इरशाद, राहुल मौर्या, उमाकांत मौर्या, शिव मौर्या, अर्चना मौर्या, कल्पना, शशि पटेल समेत सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल थे। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे सालों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई गंभीरता नहीं दिख रही।
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, जहां अगली सुनवाई 4 फरवरी को होने वाली है। अभ्यर्थी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द न्याय मिलेगा, वरना उनका आंदोलन और तेज होगा। यूपी की इस भर्ती विवाद ने हजारों युवाओं का भविष्य अटका रखा है, और अब सड़कों पर उनकी आवाज बुलंद हो रही है।




