संविधान अब सिर्फ किताबों या क्लासरूम की दीवारों तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बड़ौत नगर पालिका परिसर में विकसित संविधान पार्क ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, जहां बच्चे खेलते-खेलते संविधान के मूल्यों – न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व – को समझेंगे, युवा नागरिक कर्तव्यों से जुड़ेंगे और हर आयु वर्ग का व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएगा।
यह पार्क “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को जमीन पर उतारने का जीता-जागता उदाहरण है। यहां की सबसे बड़ी खासियत है 600 किलोग्राम वजनी संविधान की किताब की विराट प्रतिकृति – जो पूरी तरह रिसाइकल्ड मटीरियल (कचरे) से बनी है। यह प्रतिकृति 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी है, जो न सिर्फ आकार में भव्य है, बल्कि संविधान की प्रस्तावना के माध्यम से गहरा संदेश देती है। यह यूपी के नवाचार की नई पहचान बन चुकी है!

पार्क की प्रमुख विशेषताएं – एक ओपन क्लासरूम और लाइब्रेरी का रूप
- विराट संविधान प्रतिकृति – प्रस्तावना के साथ न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का सशक्त प्रतीक।
- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा – आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता हुआ, रिसाइकल्ड मटेरियल से बना।
- वाटर कियोस्क – बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर, जो स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव दर्शाता है।
- अधिकारों एवं कर्तव्यों के बोर्ड – आसान भाषा में नागरिकों को उनके हक और फर्ज की याद दिलाते।
- बुक प्वाइंट और स्ट्रीट लाइब्रेरी – टहलते हुए पढ़ाई का आनंद, बच्चों के लिए खेल-खेल में सीख।
- स्वास्थ्य और फिटनेस जोन – शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक-बौद्धिक विकास।
यह पार्क सिर्फ हरियाली या टहलने की जगह नहीं – बल्कि एक जीवंत ओपन क्लासरूम है, जहां सीखना बोझ नहीं, अनुभव बन जाता है। बच्चे खेलते-खेलते संविधान समझेंगे, बुजुर्गों को भी जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश मिलेगा।
लोकार्पण और प्रशासन की सराहना
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर इस पार्क का भव्य लोकार्पण किया गया। राज्यमंत्री केपी मलिक, जिलाधिकारी अस्मिता लाल और नगर पालिका अध्यक्ष बबीता तोमर ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी जुड़ी हो।
यह पार्क पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और नागरिक शिक्षा का बेहतरीन मॉडल है – कचरे से बनी संरचना आज लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। बागपत का यह संविधान पार्क अब पूरे देश के लिए एक प्रेरक मिसाल बन चुका है!




