यूजीसी बिल 2026 को लेकर देशभर में सियासी और सामाजिक हलचल तेज है। कई राज्यों में इस प्रस्तावित कानून के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजद नेता लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे Tej Pratap Yadav ने भी यूजीसी के नए नियमों पर अपनी राय रखी है।
मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बयान जारी कर यूजीसी द्वारा लाए गए नए प्रावधानों का खुलकर समर्थन किया।
यूजीसी के नए नियमों पर क्या बोले तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप यादव ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत University Grants Commission द्वारा लागू किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के छात्रों के हित में एक ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने कहा कि ये नियम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने की दिशा में अहम कदम हैं। साथ ही प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में इक्विटी कमेटी गठित करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाना बेहद सराहनीय है।
इक्विटी कमेटी को लेकर प्रमुख बातें
तेज प्रताप यादव के अनुसार इस कानून के तहत बनने वाली इक्विटी कमेटी:
एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी
तय समय-सीमा में शिकायतों का निपटारा करेगी
छात्रों को समान अवसर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल प्रदान करेगी
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को वास्तविक समानता प्रदान करेगी और संविधान में निहित समानता व अधिकारों को और अधिक मजबूती देगी।
जनशक्ति जनता दल का स्पष्ट समर्थन
तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल इस कानून का पूरी तरह स्वागत और समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी द्वारा उठाया गया यह कदम लंबे समय से जरूरी था।
साथ ही उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो इस कानून को सनातन परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं। तेज प्रताप यादव ने कहा कि दलित, आदिवासी और पिछड़ा समाज भी सनातन परंपरा का ही हिस्सा है और वे सभी हमारे भाई-बहन हैं।





