UGC के नए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी’ नियमों को लेकर यूपी में चल रहे विवाद में एक और बड़ा बयान सामने आया है। अयोध्या के प्रसिद्ध संत स्वामी परमहंस दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सख्त शब्दों में मांग की है कि या तो UGC का यह ‘काला कानून’ तुरंत वापस लिया जाए या उन्हें इच्छामृत्यु (euthanasia) की अनुमति दी जाए। यह पत्र UGC नियमों के खिलाफ बढ़ते विरोध का सबसे तीव्र रूप माना जा रहा है, जहां संत ने इसे सवर्ण समाज और हिंदू अस्मिता पर हमला बताया है।
पत्र में क्या लिखा है?
स्वामी परमहंस दास ने पत्र में UGC के नए नियमों को ‘सवर्ण विरोधी’ और ‘हिंदू समाज को कमजोर करने वाला’ करार दिया। उनका कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा में SC/ST/OBC छात्रों के लिए बनाई गई कमिटी और मॉनिटरिंग सिस्टम से जनरल कैटेगरी (खासकर ब्राह्मण और सवर्ण) के छात्रों के हितों पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे जातीय विभाजन बढ़ेगा और शिक्षा का माहौल बिगड़ेगा। उन्होंने लिखा कि अगर सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती तो वे जीवन से निराश होकर इच्छामृत्यु चुनना चाहेंगे, क्योंकि ऐसे नियमों के साथ जीना असंभव हो गया है। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे अपील की है कि हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत कार्रवाई करें।
स्वामी परमहंस दास कौन हैं?
अयोध्या के तपस्वी छावनी से जुड़े स्वामी परमहंस दास राम मंदिर आंदोलन और हिंदू राष्ट्र की मांग के लिए जाने जाते हैं। वे पहले भी आमरण अनशन, जल समाधि की धमकी और राष्ट्रपति को पत्र लिख चुके हैं। 2020 में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की मांग पर जन्मदिन पर इच्छामृत्यु की अपील की थी। अब UGC विवाद में उनका यह पत्र यूपी के सवर्ण समाज और धार्मिक नेताओं के गुस्से को और भड़का रहा है।
सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
अभी तक पीएमओ या UGC से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यूपी सरकार के सूत्रों का कहना है कि नियम जनहित में हैं और गलतफहमियां दूर की जाएंगी। विपक्ष इसे BJP की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका बता रहा है।




