विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रस्तावित नए नियमों को लेकर जारी विरोध के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश से गए सामान्य वर्ग के संगठन सवर्ण आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित University Grants Commission कार्यालय में यूजीसी चेयरमैन से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 15 मिनट तक चली, जिसमें नियमों को लेकर संगठन की आपत्तियां विस्तार से रखी गईं।
बैठक के दौरान यूजीसी चेयरमैन ने सवर्ण आर्मी के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि उन्हें 15 दिनों का समय दिया जाए, ताकि वे इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत कर सकें। यूजीसी की ओर से स्पष्ट किया गया कि नियम सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं, हालांकि संगठन की आपत्तियों को भी सुना गया।
सवर्ण आर्मी ने बैठक में कहा कि इस तरह के नियमों की आवश्यकता ही संदिग्ध है। संगठन का आरोप है कि बिल लाने से पहले न तो छात्रों से चर्चा की गई और न ही शिक्षकों से कोई राय ली गई। सवर्ण आर्मी ने मांग रखी कि यदि सरकार फिर भी इस बिल को लागू करना चाहती है, तो इसमें सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
दूसरी तरफ सवर्ण आर्मी की तरफ से साफ कर दिया गया है कि सामान्य वर्ग की तरफ से पूरे देश में प्रदर्शन चलते रहेंगे. बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे. इस बिल के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन किए जाएंगे. मगर सवर्ण आर्मी की तरफ से ये भी साफ कर दिया गया है कि अब वह 16वें दिन आकर नई दिल्ली स्थित यूजीसी दफ्तर में विरोध प्रदर्शन करेगी. मगर इस बीच बाकी देश में प्रदर्शन जारी रहेंगे.
चर्चा में क्या बात हुई?
सवर्ण आर्मी ने बताया, यूजीसी चेयरमैन की तरफ से बताया गया कि ये बिल काफी सोच विचार करके, सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के बाद लाया गया है. इसके बाद सवर्ण आर्मी की तरफ से कहा गया कि एक तो इस कानून की जरूरत नहीं है. दूसरी बात ये है कि इसको लेकर सरकार ने ना छात्रों से बात की और ना ही शिक्षकों से बात की. सवर्ण आर्मी ने कहा कि अगर फिर भी बिल लाना है तो बिल में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व रखा जाए और शिकायतकर्ता की पहचान छिपाई नहीं जाए. इसी के साथ सवर्ण आर्मी ने कहा कि अगर जांच में शिकायत गलत निकलती है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए. उसके खिलाफ भी वही कार्रवाई की जाए जो शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ होती.





