वृंदावन, 23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी के पावन अवसर पर वृंदावन के प्रसिद्ध शाहजी मंदिर (टेढ़े-मेढ़े खंभों वाला मंदिर) में साल भर बंद रहने वाला ‘वसंती कमरा’ आज खुल गया। सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जुट गई, जो प्रभु शाहबिहारी (राधारमण लाल जी) की बसंती झांकी के दर्शन के लिए बेताब थे। रंग-बिरंगी झाड़-फानूसों की चमकदार रोशनी में श्रीजी ने भक्तों को अद्भुत दर्शन दिए ये दृश्य देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया!
वसंती कमरे की खासियत और महत्व
शाहजी मंदिर में स्थित यह वसंती कमरा (बसंती राजदरबार या पीला कमरा) साल में सिर्फ दो बार खुलता है एक बसंत पंचमी पर और दूसरा झूलन यात्रा के दौरान। यह कमरा अपनी प्राचीन वास्तुकला, बेल्जियन ग्लास के झूमरों, रंगीन चित्रों और फव्वारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। कमरे में ठाकुर जी का विशेष बसंती श्रृंगार किया जाता है पीले वस्त्र, फूलों की मालाएं और दिव्य प्रकाश की छटा ऐसी कि भक्तों को लगता है जैसे वे वास्तव में वसंत ऋतु के राजदरबार में पहुंच गए हों।
सेवायत शाह प्रशांत कुमार ने बताया कि भोर से ही भक्त लाइन में लग गए थे। सुबह 10 बजे जैसे ही कमरे के पट खुले, श्रद्धालु उमड़ पड़े। बड़े-बड़े शोभायमान झाड़-फानूसों से निकलती रंग-बिरंगी रोशनी ने पूरे कमरे को दैदीप्यमान बना दिया। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भी इस दुर्लभ दर्शन का आनंद लिया।
दूसरा दिन का विशेष समय
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, शनिवार (24 जनवरी) शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक एक बार फिर वसंती कमरा खुलेगा, जहां श्रीजी भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर को पूरी तरह रोशनी से सजाया गया है, ताकि भक्तों को और भी दिव्य अनुभव मिले।
शाहजी मंदिर का इतिहास एक झलक में
1860-1868 के बीच लखनऊ के शाह कुंदन लाल और फुंदन लाल द्वारा निर्मित यह मंदिर राधा-रमण लाल जी (छोटे राधारमण) को समर्पित है। टेढ़े-मेढ़े खंभों और अनूठी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। वसंती कमरा यहां की सबसे बड़ी खासियत है – जहां भक्त साल भर इंतजार करते हैं इस दिव्य झांकी का!
भक्तों की भावुकता
भक्त कह रहे हैं “साल भर का इंतजार खत्म हो गया! झाड़-फानूसों की रोशनी में श्रीजी की मुस्कान देखकर मन को शांति मिली।” विदेशी पर्यटक भी इस अद्भुत दृश्य को देखने पहुंचे हैं।




