”बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर राजनीतिक और सामाजिक संदेश देते हुए ब्राह्मण समाज को लेकर बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी के “बाटी-चोखे” की ज़रूरत नहीं है और उन्हें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
ब्राह्मणों की उपेक्षा का आरोप
मायावती ने कांग्रेस, सपा और भाजपा पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मणों को उचित भागीदारी दी गई थी और उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय या अत्याचार नहीं हुआ। उनका कहना था कि बसपा ने हमेशा सभी वर्गों को सम्मान और सुरक्षा देने का काम किया है।
सपा पर तीखा हमला
इस दौरान मायावती ने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा का शासन “गुंडों और माफियाओं का राज” रहा है, जिसमें दलित समाज को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन सरकारी गेस्ट हाउस में सपा से जुड़े हजारों लोगों ने उन पर जानलेवा हमला किया था।
दलितों और महापुरुषों का अपमान बताया
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में दलित समाज के सम्मान और महापुरुषों से जुड़े प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार बनने पर किसी भी समाज के खिलाफ जुल्म नहीं होने दिया जाएगा।
क्षत्रिय और यादव समाज का भी उल्लेख
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनने पर ब्राह्मणों के साथ-साथ क्षत्रिय समाज का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यादव समाज का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा ने हमेशा यादव समाज के हितों का ख्याल रखा है और आगे भी रखेगी।
दंगों पर सख़्त रुख
उन्होंने यह भी कहा कि उनके शासनकाल में प्रदेश में कोई दंगा नहीं होने दिया गया और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हैं।





