उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर क्षत्रिय नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। सोशल मीडिया पर उठे सवाल— “सबसे बड़ा ठाकुर नेता कौन?” —ने सियासी बहस को और हवा दे दी है। इसी मुद्दे पर अब भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
सोशल मीडिया तुलना से बढ़ी नाराज़गी
हाल ही में ‘राष्ट्रकथा’ कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर बृजभूषण शरण सिंह की तुलना राजा भैया और अभय सिंह से की जाने लगी। इस तुलना को लेकर असहजता जताते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने खुद वीडियो जारी कर अपनी बात रखी।
राजा भैया से रिश्तों पर क्या बोले बृजभूषण
करीब तीन मिनट के वीडियो में उन्होंने कहा कि राजा भैया के पिता उदय सिंह उनके आदर्श रहे हैं। राजा भैया को उन्होंने छोटे भाई की तरह बताते हुए कहा कि दोनों के बीच पारिवारिक और मित्रवत संबंध हैं। उन्होंने साफ किया कि आपसी रिश्तों में किसी तरह की प्रतिस्पर्धा या कटुता नहीं है।
‘सबसे बड़ा क्षत्रिय नेता’ पर दो टूक जवाब
हालांकि, जब सवाल ‘सबसे बड़े क्षत्रिय नेता’ का आया तो बृजभूषण शरण सिंह का लहजा सख़्त नजर आया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौजूदा राजनीति में आज भी राजनाथ सिंह ही देश और उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े क्षत्रिय नेता हैं। वीडियो में उनके शब्दों के साथ भाव भी साफ झलक रहे थे।
सोशल मीडिया से समाज को बांटने पर चेतावनी
उन्होंने समाज को सोशल मीडिया के ज़रिए बांटने की कोशिशों से बचने की अपील की। उनका कहना था कि ऐसे सवाल और तुलना समाज में अनावश्यक भ्रम और विभाजन पैदा करती है।
सियासी संकेत और नाराज़गी के मायने
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि उनकी नाराज़गी उन नेताओं को लेकर है जो ‘राष्ट्रकथा’ जैसे आयोजनों में शामिल नहीं हुए। हालांकि, इस पर उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया।
एकजुटता का संदेश
बृजभूषण शरण सिंह का संदेश साफ है— नेतृत्व की होड़ से ज़्यादा ज़रूरी समाज की एकजुटता है। उनके शब्दों में, “राष्ट्रकथा जोड़ने के लिए था, तोड़ने के लिए नहीं।”





