भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने राष्ट्रकथा को एक सतत सामाजिक और सांस्कृतिक अभियान बताते हुए घोषणा की है कि अब इसका आयोजन प्रत्येक वर्ष निर्धारित तिथि पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “दिन भले घट जाएँ, लेकिन राष्ट्रकथा होकर रहेगी।” यह राष्ट्रकथा गुरुदेव भगवान रितेश्वर महाराज जी के श्रीमुख से सुनाई जाएगी, जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से यह विचार इस वर्ष साकार रूप ले सका।
वर्षों पुराना विचार, गुरुदेव के आशीर्वाद से हुआ साकार
बृजभूषण सिंह ने बताया कि राष्ट्रकथा का विचार उनके मन में कई वर्षों से था, लेकिन उपयुक्त समय और परिस्थितियों की प्रतीक्षा थी। इस वर्ष गुरुदेव भगवान रितेश्वर महाराज जी के आशीर्वाद से यह संकल्प पूर्ण हो सका। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास है।
आठ दिन की कथा, तेरह दिनों तक चला आयोजन
राष्ट्रकथा का आयोजन मूल रूप से आठ दिनों के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन व्यापक तैयारियों, जनभागीदारी और समापन प्रक्रिया को देखते हुए यह कार्यक्रम कुल तेरह दिनों तक चला। बृजभूषण सिंह ने कहा कि इसकी तैयारियाँ महीनों पहले शुरू कर दी गई थीं और इतने बड़े आयोजन का सफल समापन होना अत्यंत प्रसन्नता और संतोष का विषय है।
जनभागीदारी ने बनाया आयोजन को ऐतिहासिक
इस राष्ट्रकथा में क्षेत्र के लोगों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। गोंडा, बस्ती, बहराइच सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लोगों ने जिस उत्साह, समर्पण और सहयोग के साथ सहभागिता निभाई, उसी का परिणाम है कि यह आयोजन ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बन सका।
धार्मिक नहीं, समाज को जोड़ने वाला विचार
बृजभूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रकथा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह समाज को जोड़ने वाला एक विचार है, जिसने जाति, वर्ग और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को आपस में जोड़ा। राष्ट्रकथा की चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में हुई, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता और सफलता का प्रमाण है।

एकता, सौहार्द और सकारात्मक संदेश देना उद्देश्य
उन्होंने कहा कि राष्ट्रकथा का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता, सौहार्द और सकारात्मक संदेश को आगे बढ़ाना है। वर्तमान समय में देश में सौहार्द और उत्साह का वातावरण है, और ऐसे आयोजनों से सामाजिक समरसता और अधिक मजबूत होती है। राष्ट्रकथा के माध्यम से लोगों को जोड़ने और देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य निरंतर किया जाएगा।
हर वर्ष होगा आयोजन
पूर्व सांसद ने यह भी घोषणा की कि अब प्रत्येक वर्ष इसी तिथि पर गुरुदेव भगवान रितेश्वर महाराज जी की राष्ट्रकथा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक निरंतर चलने वाली परंपरा बनेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य होगा।
जनसहयोग के बिना संभव नहीं ऐसे आयोजन
बृजभूषण सिंह ने कहा कि बिना जनसहयोग के इस प्रकार के विशाल आयोजनों की कल्पना भी संभव नहीं है। समाज के हर वर्ग कर्मचारी, स्वयंसेवक, सहयोगी और किसान ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन पर सहयोगियों का हुआ सम्मान
कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर नंदिनी निकेतन में आयोजित राष्ट्रकथा के विधिवत समापन के बाद सहयोगियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले कर्मचारियों, सहयोगी गणों तथा उन किसानों को भी सम्मानित किया गया, जिनके खेतों में पार्किंग की व्यवस्था की गई थी।
यह सम्मान समारोह इस बात का प्रतीक बना कि राष्ट्रकथा केवल मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।




